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Consumer Court: ग्राहक की अनुमति के बिना बैंक ने साझा की खाते की जानकारी, कंज्यूमर कोर्ट ने SBI पर ठोका जुर्माना

डेस्क: बिजनेस डेस्कः ग्राहक की अनुमति के बिना उसके बैंक खाते का स्टेटमेंट तीसरे पक्ष को उपलब्ध कराना भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को महंगा पड़ गया। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी और ग्राहक की गोपनीयता का उल्लंघन मानते हुए एसबीआई पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया है।
क्या था मामला?
मामला शिकायतकर्ता पंकज कुमार शुक्ला से जुड़ा है, जो पहले गोविंद शुगर मिल में कार्यरत थे। उनका सीतापुर जिले की एसबीआई हरगांव शाखा में एक व्यक्तिगत बचत खाता था। शुक्ला और उनकी पूर्व कंपनी के बीच श्रम विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में लंबित था। इसी दौरान कंपनी ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे के साथ शुक्ला के निजी बैंक खाते का स्टेटमेंट भी प्रस्तुत किया।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि उन्होंने कभी भी बैंक को अपने खाते की जानकारी किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा करने की अनुमति नहीं दी। उनका कहना था कि बैंक की इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिकायत में यह भी कहा गया कि बैंक स्टेटमेंट में कुछ गलत प्रविष्टियां थीं, जिन्हें एसबीआई ने बाद में पत्र जारी कर स्वीकार किया और सुधार भी किया। जब शुक्ला ने बैंक से बिना अनुमति स्टेटमेंट साझा करने का कारण पूछा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में एसबीआई की मुख्य शाखा ने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि गोविंद शुगर मिल के अनुरोध पर संबंधित बैंक स्टेटमेंट उपलब्ध कराया गया था।
एसबीआई की दलील
सुनवाई के दौरान एसबीआई ने दलील दी कि गोविंद शुगर मिल का वेतन खाता बैंक की मुख्य शाखा में था और वेतन रिकॉर्ड के सत्यापन के लिए कंपनी ने स्टेटमेंट मांगा था। बैंक ने इसे वैध प्रक्रिया बताते हुए सेवा में कमी से इनकार किया।
हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने बैंक की दलील स्वीकार नहीं की। आयोग ने कहा कि विवादित खाता शुक्ला का व्यक्तिगत बचत खाता था, जिसका उनकी सैलरी या कंपनी के भुगतान से कोई संबंध नहीं था। ऐसे में ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना उसके खाते की जानकारी किसी तीसरे पक्ष को देना बैंकिंग गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन है।
आयोग ने क्या कहा?
आयोग ने एसबीआई की हरगांव शाखा और लखीमपुर खीरी मुख्य शाखा दोनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताड़ना के लिए 20,000 रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही, शिकायत दर्ज होने की तारीख 26 जुलाई 2022 से भुगतान तक इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने और 5,000 रुपए मुकदमे के खर्च के रूप में अलग से भुगतान करने का निर्देश भी दिया।

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