डेस्क: मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. किडनी निकालने वाले गिरोह की अफवाह से भयभीत एक 72 साल के बुजुर्ग करीब 50 घंटे तक बीएसएनएल के लगभग 250 फीट ऊंचे टावर पर बैठे रहे. इस दौरान उन्होंने तेज धूप, बारिश और रात की ठंडी हवाओं का सामना किया. पुलिस, प्रशासन और रेस्क्यू टीम लगातार उन्हें नीचे उतरने के लिए समझाती रही, लेकिन डर के कारण वह किसी की बात मानने को तैयार नहीं हुए. आखिरकार घंटों की मशक्कत और भरोसा दिलाने के बाद उन्हें सुरक्षित नीचे उतार लिया गया.
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर निवासी अंबुज डिगर किसी निजी काम से पांढुर्णा आए थे. इसी दौरान उन्हें भ्रम हो गया कि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे हैं और उनकी किडनी निकालना चाहते हैं. खुद को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने शहर के तीन शेर चौक स्थित बीएसएनएल के टावर पर चढ़ने का फैसला किया. देखते ही देखते यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई.
सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, नगर पालिका, स्वास्थ्य विभाग और बिजली विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं. अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बुजुर्ग को बिना किसी जोखिम के नीचे उतारना था. जल्दबाजी करने के बजाय रेस्क्यू टीम ने लगातार उनसे बातचीत की. इस दौरान उन्हें भोजन और पानी भी उपलब्ध कराया गया ताकि उनकी तबीयत खराब न हो. कई घंटों तक समझाइश और विश्वास दिलाने का प्रयास जारी रहा.
करीब 50 घंटे बाद रेस्क्यू टीम ने बुजुर्ग को सुरक्षित नीचे उतार लिया. इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया. चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक ऊंचाई पर रहने, भूख-प्यास और मौसम की मार झेलने के बावजूद उनकी हालत सामान्य पाई गई. एहतियात के तौर पर उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जा रहा है.
रेस्क्यू अभियान में टावर टेक्नीशियन राजा पवार, पुलिस आरक्षक नितेश रघुवंशी और स्थानीय युवक संदीप ने अहम भूमिका निभाई. सुरक्षा उपकरणों के साथ टावर पर पहुंची टीम को देखकर बुजुर्ग घबरा गए और हाथ में मौजूद लोहे की रॉड से हमला करने की कोशिश की. हालांकि टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए पहले रॉड हटाई, फिर उन्हें शांत कराया, पानी पिलाया और सुरक्षा के साथ नीचे उतार लिया.
बाद में तलाशी के दौरान उनके पास से मिली डायरी के आधार पर पुलिस ने परिजनों से संपर्क किया. परिवार ने बताया कि अंबुज डिगर करीब एक सप्ताह से लापता थे और उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज थी. परिजनों ने स्पष्ट किया कि वह मानसिक रूप से बीमार नहीं हैं. घर से निकलते समय उन्हें किडनी चोर गिरोह की अफवाहों से सावधान रहने की बात कही गई थी, जिसे उन्होंने सच मान लिया. पुलिस ने कहा कि मामले में किसी आपराधिक साजिश के प्रमाण नहीं मिले हैं. यह घटना अफवाह और भय के खतरनाक असर का उदाहरण है.

