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पीओके में विरोध प्रदर्शन तेज, आंदोलनकारियों पर कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप; नेताओं को बताया जा रहा आतंकी

डेस्क: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में  राजनीतिक अधिकारों और संवैधानिक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आंदोलन से जुड़े संगठनों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा (Pakistani security) बल प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरत रहे हैं और आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोगों को आतंकवादी बताकर कार्रवाई की जा रही है।
कई इलाकों में जारी हैं प्रदर्शन
रावलाकोट, मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली, बाग, हट्टियान बाला, सूधनोटी, ढेरकोट और डड्याल सहित कई क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। आंदोलन से जुड़े समूहों का आरोप है कि सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया जा रहा है।
कुछ स्थानीय संगठनों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और कई युवतियों के लापता होने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आंदोलन के नेताओं पर लगे आरोप
आंदोलन का नेतृत्व कर रही संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें राजनीतिक अधिकारों और स्थानीय जनता की भागीदारी से जुड़ी हैं। संगठन का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है।
राजनीति

वहीं, पाकिस्तानी प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं और संगठनों पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान  सरकार जेएएसी की गतिविधियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाए हुए है और उस पर प्रतिबंध समेत कई कार्रवाई की गई हैं।
रावलाकोट बना आंदोलन का प्रमुख केंद्र
रिपोर्टों के मुताबिक, रावलाकोट विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। आंदोलनकारी संगठनों का दावा है कि हाल के सप्ताहों में प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की जान गई है। हालांकि मृतकों की संख्या और घटनाओं के संबंध में अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
राजनीतिक अधिकारों की मांग
जेएएसी का कहना है कि पीओके के लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकार और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए। संगठन का आरोप है कि इस्लामाबाद स्थानीय जनता की राय को नजरअंदाज कर फैसले थोप रहा है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
भारत से मदद की अपील
आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं ने भारत सरकार से समर्थन और सहायता की अपील की है। वहीं, पीओके से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाले कुछ संगठनों ने भी वहां के लोगों की स्थिति पर चिंता जताई है।
फिलहाल पीओके की स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर है। ऐसे में घटनाक्रम से जुड़े कई आरोपों और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

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