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24 साल पुराने चर्चित इंद्र देव सिंह ह*त्याकांड में बड़ा फैसला, 3 हत्यारों को उम्रकैद, डेढ़ लाख का जुर्माना; लखनऊ में हुआ था कत्ल

डेस्क: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2002 में लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और नोएडा पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के पिता अधिवक्ता इंद्र देव सिंह की हत्या के मामले में मंगलवार को तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले के तीन अन्य आरोपियों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा ने शूटर विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और ब्रजेश कुमार यादव उर्फ मुन्ना को हत्या व आपराधिक साजिश का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने 30 जून को तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। विशेष लोक अभियोजक के.पी. सिंह के अनुसार, विक्रम यादव पहले से जेल में बंद था जबकि पन्ना सिंह और ब्रजेश कुमार जमानत पर रिहा थे। हालांकि दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत ने दोनों की जमानत रद्द कर उन्हें सजा सुनाए जाने तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। शिकायतकर्ता नयनतारा की ओर से अधिवक्ता आर.के. यादव ने मुकदमे के दौरान सीबीआई अभियोजन पक्ष की सहायता की। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इंद्र देव सिंह की आठ अगस्त 2002 को अदालत से स्कूटर पर लौटते समय जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस संबंध में उनकी पत्नी नयनतारा ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस और बाद में सीबीआई की जांच में सामने आया कि विक्रम यादव ने गोली चलाई थी जबकि ब्रजेश कुमार हमले में इस्तेमाल किए गए स्कूटर पर सवार था। प्रारंभिक प्राथमिकी में सुरजन लाल वर्मा, डॉ. सुषमा वर्मा और सुरेश वर्मा के नाम शामिल थे लेकिन जांच के दौरान उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। अधिकारियों के मुताबिक, कथित साजिशकर्ता वेद प्रकाश उर्फ नेता, मन्ना लाल गुप्ता और छोटे लाल की मुकदमे के दौरान मौत हो गई।

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