डेस्क:लखनऊ । कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने लखनऊ में अग्निकांड, शिवसेना (यूबीटी) सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने, टीएमसी के बागी विधायकों द्वारा नई कमेटी बनाने सहित कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सुरेंद्र राजपूत ने लखनऊ अग्निकांड को हत्या बताते हुए मुख्यमंत्री से माफी मांगने की बात कही। लखनऊ अग्निकांड को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा एसआईटी गठित करने पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह घटना अत्यंत दुखद है। भविष्य का सपना संजोने वाले बच्चों की असमय मृत्यु ने सबको झकझोर दिया है। इस मामले में किसे दोषी ठहराया जाए, यही समझ में नहीं आता। अधिकारी घूस लेकर बिल्डिंग बनाते हैं और ठेकेदार-व्यापारी घूस देकर बिल्डिंग बनवाते हैं। पूरे सिस्टम में खराबी है, यह एक आदमी से ठीक नहीं हो सकता।” कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “अगर सच में सरकार इस मामले में कुछ कार्रवाई करना चाहती है, तो सबसे पहले अपनी जिम्मेदारी ले और प्रायश्चित करे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनता के सामने स्वीकार करें कि हमसे गलती हुई है। सिस्टम की कमी और लापरवाही से बच्चों की मौत हुई है और ये हादसा नहीं बल्कि संस्थागत हत्या है। सरकार के खिलाफ भी हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। सिर्फ मुआवजे की घोषणा करने से मृतक बच्चों के माता-पिता का दुख कम नहीं होगा।”
80 से अधिक मामलों में सरकार ने एसआईटी गठित की है। हालांकि एसआईटी अब तक कितने लोगों को सजा दिला पाई है, यह आज तक नहीं पता चला। एसआईटी तो अपराधियों को बचाने का एक तरीका है। इससे पहले दो बिल्डिंग में हादसा हुआ था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं, ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय को टीएमसी का नया चेयरमैन बनाने पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “यह भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर हुआ है। भाजपा लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है। भाजपा ने पहले विधायकों को खरीदा और अब पूरी पार्टी का अपहरण करने की कोशिश कर रही है।
उधर, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के ‘ऑपरेशन टाइगर’ के सफल होने के बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “इससे ज़्यादा बेशर्मी की बात और क्या हो सकती है? आप ईडी, सीबीआई, महाराष्ट्र पुलिस का इस्तेमाल करके या पैसे का लालच देकर ऐसे सांसदों को अपनी तरफ ला रहे हैं। ये वे लोग हैं, जो किसी और के चुनाव चिह्न पर जीते थे। वे उद्धव ठाकरे की मदद से शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिह्न पर जीते थे। बाद में इन सभी भाजपा के प्रलोभन के चलते पाला बदल लिया।

