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भगवंत मान को अकाल तख्त ने घोषित किया ‘गुरु दोखी’, विवादित वीडियो मामले में सिख समुदाय से संबंध तोड़ने की अपील

डेस्क:पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को लेकर एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक घटनाक्रम में अकाल तख्त के पांच सिंह साहिबानों ने उन्हें “गुरु दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित कर दिया है. सोमवार, 15 जून को सिख धर्म की सर्वोच्च सांसारिक संस्था अकाल तख्त में हुई बैठक के बाद यह फैसला सुनाया गया. साथ ही दुनिया भर के सिख समुदाय से मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ सामाजिक और राजनीतिक संबंध समाप्त करने की अपील भी की गई है.अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने तख्त से यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से जुड़े एक विवादित वीडियो की फॉरेंसिक जांच रिपोर्टों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है.

विवादित वीडियो पर फॉरेंसिक जांच के बाद फैसला

यह पूरा मामला एक वीडियो को लेकर सामने आया था, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान जैसे दिखने वाले व्यक्ति को सिख गुरुओं के चित्रों पर कथित रूप से शराब छिड़कते और अन्य आपत्तिजनक हरकतें करते हुए दिखाया गया था. वीडियो में दमदमी टकसाल के पूर्व प्रमुख स्वर्गीय जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीर पर भी कथित रूप से शराब डाले जाने का दावा किया गया था.

15 जनवरी को अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर भगवंत मान ने इस वीडियो को फर्जी बताया था. उन्होंने दावा किया था कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है या इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया है. इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने मुख्यमंत्री से दो स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब्स के नाम सुझाने को कहा था ताकि वीडियो की सत्यता की जांच की जा सके.

अकाल तख्त का दावा, जांच में वीडियो मिला असली

अकाल तख्त के अनुसार, 27 जनवरी को मुख्यमंत्री और पंजाब सरकार को इस संबंध में पत्र भी भेजा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद सचिवालय ने स्वयं दो सरकारी मान्यता प्राप्त फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं से वीडियो की जांच करवाई.

ज्ञानी गर्गज्ज ने बताया कि दोनों लैब्स की रिपोर्ट में वीडियो को मूल, बिना एडिट किया हुआ और AI से निर्मित न होने की पुष्टि हुई है. उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्टों ने मुख्यमंत्री के दावों को खारिज कर दिया है.

मंत्रियों और विधायकों को भी तलब किया गया

अकाल तख्त ने केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि हाल ही में पारित किए गए जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 का समर्थन करने वाले सिख मंत्रियों और विधायकों को भी तलब किया है.

ज्ञानी गर्गज्ज ने घोषणा की कि पंजाब कैबिनेट के सभी सिख मंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के वे सभी सिख विधायक जिन्होंने इस विधेयक के पक्ष में मतदान किया था, उन्हें 29 जून को अकाल तख्त में पेश होने का निर्देश दिया गया है.

अकाल तख्त का कहना है कि यह कानून केंद्रीय सिख संस्थाओं और व्यापक पंथिक प्रतिनिधियों से पर्याप्त परामर्श किए बिना विधानसभा में पारित किया गया था. इसके अलावा पंजाब सरकार के गैर-सिख मंत्रियों को भी इस विधेयक का समर्थन करने के संबंध में लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है.

सिख समुदाय से दूरी बनाए रखने की अपील

कार्यवाहक जत्थेदार ने कहा कि वीडियो में दिखाई गई कथित गतिविधियां ऐसी हैं जिन्हें सिख समुदाय नजरअंदाज नहीं कर सकता. इसी कारण मुख्यमंत्री को धार्मिक मामलों से अलग करने का निर्णय लिया गया है.

ज्ञानी गर्गज्ज ने कहा, “15 जून को सिंह साहिबानों ने उन्हें गुरु दोखी और खालसा पंथ विरोधी घोषित किया है. साथ ही सभी सिख विधायकों और मंत्रियों को 29 जून को अकाल तख्त में पेश होने का आदेश दिया गया है.” उन्होंने यह भी कहा कि “गुरु खालसा पंथ इस नूं मुंह ना लगावे”, यानी सिख समुदाय उनसे किसी प्रकार का संपर्क न रखे.

अकाल तख्त ने अपने फैसले में कहा कि अब यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि मुख्यमंत्री भगवंत मान सिख समुदाय के हितों और मूल्यों के अनुरूप शासन संबंधी फैसले लेंगे. फिलहाल पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अकाल तख्त के इस आदेश या 29 जून को जारी समन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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