राष्ट्रीय

कौन हैं राज रेड्डी, जिन्हें कहा जाता है फॉदर ऑफ इंडियन एआई|

डेस्क:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास और वर्चस्व की इस जंग में भले ही अमेरिका और चीन सबसे आगे हों और भारत उनसे थोड़ा पीछे नजर आ रहा हो, लेकिन इस क्षेत्र के शुरुआती विचारकों और रचनाकारों में आज भी एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक का नाम सबसे ऊपर आता है। हम बात कर रहे हैं डॉ. डब्बाला राजगोपाल “राज” रेड्डी की। डॉ. रेड्डी फिलहाल कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस विभाग में मोज़ा बिंत नासिर यूनिवर्सिटी प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी रिसर्च का मुख्य केंद्र ‘ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरैक्शन’ (इंसान और कंप्यूटर का आपसी तालमेल) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रहा है। इसके साथ ही, वर्तमान में वे ‘स्पोकन लैंग्वेज सिस्टम’ (आवाज़ पहचानने वाली तकनीक), ‘गीगाबिट नेटवर्क’, ‘यूनिवर्सल डिजिटल लाइब्रेरी’ और ‘डिस्टेंस लर्निंग ऑन डिमांड’ (मांग पर दूरस्थ शिक्षा) जैसे कई क्रांतिकारी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। उस दौर में, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज की तरह कोई कल्ट या ‘बज़वर्ड’ नहीं बना था, इसने एक ऐसे शख्स का ध्यान अपनी ओर खींचा जिनका एकमात्र बड़ा जुनून तकनीक को गरीब और विकासशील देशों तक पहुंचाना था। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा सफर, जिसने आगे चलकर इस विषय की सोच को नए आयाम दिए। विशाल डेटा सेट के बीच पैटर्न तलाशने के लिए एआई का इस्तेमाल भले ही कई दशक पुराना हो, लेकिन आज के दौर में चैटजीपीटी (ChatGPT) और बार्ड (Bard) जैसे प्रॉडक्ट्स ने जो हलचल मचाई है, उसकी सबसे बड़ी वजह ‘जनरेटिव एआई’ है। दिलचस्प बात यह है कि डॉ. रेड्डी ने पिछले 50 वर्षों में जो काम किया, उसका एक बड़ा हिस्सा इसी जनरेटिव एआई की बुनियाद तैयार करने को समर्पित रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *