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राजनीति और राजनेता के प्रति सम्मान भाव क्यों गिरा है? जिम्मेदार कौन?

दरभंगा। चुनाव एक व्यवस्था है जहा हम प्रतिनिधि चुनते हैं। पर क्या प्रतिनिधि आप चुनते हैं, या आप पर थोपे जाते हैं? उक्त बाते कहते हुए हायघाट के पूर्व विधायक, अमरनाथ गामी ने कही, उन्होंने कहा अगर आपका जवाब थोपे जाते है, तो थोपे हुए प्रतिनिधि के प्रति आदर भाव कम होना स्वाभाविक है। अब आइए गठबंधन की राजनीति पर यहा के उम्मीदवार कमाल के होते हैं। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा की 90 वोट वाले दल का प्रतिनिधित्व 10 वोट वाले करते हैं।मजबूरी में 10 वाला 90 का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में सम्मान भाव का आना संभव नहीं। जब राजनीतिक कार्यकर्ता में ही सम्मान भाव न हो, तो जनता आपको सम्मान की नजर से कैसे देखेगी? अब यह अंकगणित का खेल है जिसके पास ज्यादा संख्या,उसकी सरकार।

सहयोगी दल की जितनी जरूरत,उतनी प्रभावशाली हिस्सेदारी सत्ता में। परिणाम: आपका प्रतिनिधि जनता के प्रति उत्तरदायी नहीं रहता है, वह अपनी पार्टी के प्रति उत्तरदायी होता है। कुल मिलाकर,पार्टी जाति-जाति का खेलकर स्थानीय प्रतिबद्ध कार्यकर्ता का गला घोंट देती है। और सीट ऐसे दल को दे देती है जिसके पास क्षेत्रीय योग्य उम्मीदवार ही नहीं होता है। डोनेशन के आधार पर उम्मीदवार थोपे जाते हैं, सत्ता और विपक्ष दोनों यही करते हैं। इसी कारण जनता का विश्वास राजनीति और राजनेता से उठ रहा है।

चुनाव पूर्व गठबंधन से योग्यता का गला घोंटा जा रहा है। जरूरत है दल बिना गठबंधन के चुनाव लड़ें। अगर किसी को बहुमत कम पड़े, तब जाकर समझौता करें।

वाद-विवाद, संवाद से ही बदलाव संभव है।

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