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मुंबई से मिट गई एअर इंडिया कॉलोनियों की पहचान, 70 साल पुराना अध्याय हुआ खत्म

मुंबई: मुंबई के कलीना इलाके में कभी एअर इंडिया कर्मचारियों की जिंदगी से गुलजार रहने वाली मशहूर कॉलोनियां अब इतिहास बन चुकी हैं। करीब सात दशक तक हजारों परिवारों का आशियाना रहीं ये कॉलोनियां अब पूरी तरह खाली हो गई हैं। रविवार को यहां रहने वाले आखिरी परिवारों ने भी अपने फ्लैट छोड़ दिए।

184 एकड़ में फैली इन कॉलोनियों की शुरुआत 1955 में हुई थी। बाद में 1980 के दशक में इसका विस्तार किया गया और देखते ही देखते यह इलाका एअर इंडिया कर्मचारियों की सबसे बड़ी रिहायशी पहचान बन गया। यहां कुल 106 इमारतों में 1683 फ्लैट मौजूद थे।

अब इस पूरी जमीन का कब्जा Mumbai International Airport Limited को सौंपा जा रहा है। एयर इंडिया के निजीकरण के बाद यह प्रक्रिया तेज हुई और आखिरकार लंबे कानूनी संघर्ष के बाद कर्मचारियों को क्वार्टर खाली करने पड़े।

इन कॉलोनियों से सिर्फ घर ही नहीं जुड़े थे, बल्कि मुंबई का खेल और सामाजिक इतिहास भी जुड़ा रहा। यहां के क्रिकेट मैदान से Yashasvi Jaiswal, Ajinkya Rahane, Prithvi Shaw और Shivam Dube जैसे खिलाड़ी निकले। बीसीसीआई और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के कई कैंप भी यहां आयोजित होते रहे।

2022 में एयर इंडिया के निजीकरण के बाद कर्मचारियों और यूनियनों ने कोर्ट में लड़ाई लड़ी, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद उन्हें राहत नहीं मिल सकी। हालांकि बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए कुछ महीनों की अतिरिक्त मोहलत जरूर दी गई थी।

कभी एअर इंडिया टावर और ये कॉलोनियां मुंबई की पहचान मानी जाती थीं, लेकिन अब शहर की बदलती तस्वीर के बीच यह दौर भी खत्म हो गया। पुराने निवासी इसे सिर्फ मकान नहीं, बल्कि “एक पूरा जीवन” बता रहे हैं।

आशुतोष झा

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