ढाका/टोक्यो: एशियाई फलों के बाजार में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जापान ने भारत से आम के आयात पर रोक लगाने के बाद अब बांग्लादेश की तरफ रुख कर लिया है। टोक्यो और ढाका के बीच आम आयात को लेकर बातचीत जारी है, जबकि मलेशिया ने भी बांग्लादेशी आम खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया के कृषि व्यापार में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, जापान ने हाल ही में भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। जांच के दौरान जापानी अधिकारियों को भारत की ट्रीटमेंट सुविधाओं में कीड़ों और कीट नियंत्रण से जुड़ी कई खामियां मिली थीं। इसके बाद टोक्यो ने सख्त कदम उठाते हुए भारतीय आमों की एंट्री पर रोक लगा दी। करीब दो दशक बाद भारत के आमों पर जापान की ओर से इस तरह की कार्रवाई हुई है।
अब जापान की नजर बांग्लादेश के आम बाजार पर है। बांग्लादेशी निर्यातकों का कहना है कि जापानी अधिकारियों ने आम खरीदने में औपचारिक रुचि दिखाई है। हालांकि जापान ने इसके लिए कई सख्त शर्तें भी रखी हैं। इनमें फूड सेफ्टी, कीटनाशकों का स्तर, स्टोरेज सिस्टम और उत्पादन प्रक्रिया जैसे मानक शामिल हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच इन नियमों को लेकर बातचीत जारी है।
उधर, मलेशिया भी बांग्लादेश से आम आयात करने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक जून के पहले सप्ताह में मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंचेगा, जहां व्यापारिक समझौते पर चर्चा हो सकती है। बांग्लादेशी एक्सपोर्ट कंपनियों को उम्मीद है कि अगर बातचीत सफल रही तो इसी सीजन से मलेशिया को आम की सप्लाई शुरू हो सकती है।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह केवल व्यापारिक नुकसान नहीं बल्कि रणनीतिक झटका भी माना जाएगा। भारत लंबे समय से एशियाई बाजारों में आम का बड़ा निर्यातक रहा है। लेकिन गुणवत्ता मानकों और निरीक्षण में आई कमियों ने प्रतिस्पर्धी देशों के लिए मौका खोल दिया है।
बांग्लादेशी कारोबारी अब इसे नए अवसर के तौर पर देख रहे हैं। खासकर मलेशिया में रहने वाले बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों के कारण वहां घरेलू स्वाद वाले आमों की मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अगर जापान और मलेशिया दोनों बाजार खुलते हैं, तो बांग्लादेश के फल निर्यात को बड़ा फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में यह तय होगा कि बांग्लादेश जापान के कड़े गुणवत्ता मानकों को कितना पूरा कर पाता है। लेकिन इतना साफ है कि एशियाई आम बाजार में अब प्रतिस्पर्धा और तेज होने वाली है।
आशुतोष झा

