डेस्क:देश की शीर्ष अदालत ने भोपाल में हुई 32 वर्षीय एक्टर-मॉडल ट्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत के हाई-प्रोफाइल मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सोमवार को एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई की। इस दौरान कोर्टरूम में दहेज उत्पीड़न और वैवाहिक विवादों को लेकर बेहद भावुक और तीखी बहस देखने को मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच (जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल हैं) ने स्पष्ट किया कि कोर्ट का एकमात्र मकसद बिना किसी पूर्वाग्रह के एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करना है। साथ ही, कोर्ट ने इस मामले में मीडिया ट्रायल और लोगों के अंदाज़ों से भी सावधान रहने को कहा। यह सुनवाई तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही (suo motu) इस मामले का संज्ञान लिया। यह कदम तब उठाया गया जब भोपाल में अपने ससुराल में 32 साल की एक्टर-मॉडल की मौत की जांच में संस्थागत पक्षपात, प्रक्रिया में चूक और गड़बड़ियों के आरोप लगे थे।

