दरभंगा। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा में भारतीय गुणवत्ता परिषद् (क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया) के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार के साथ मखाना क्षेत्र के समग्र विकास, मखाना कृषकों की आय वृद्धि तथा गुणवत्ता आधारित मूल्य श्रृंखला विकसित करने को लेकर विस्तृत बैठक की। बैठक में मखाना के विभिन्न उत्पादों के लिए वैज्ञानिक गुणवत्ता मानकीकरण ढाँचा विकसित करने, किसानों के प्रशिक्षण, लक्षित क्षमता निर्माण तथा यांत्रिकीकरण की आवश्यकता पर हुई चर्चा, निर्यात में गुणवत्ता अस्वीकृति को कम करने तथा बेहतर गुणवत्ता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. मनोज कुमार ने कहा बीते वर्षों में वैज्ञानिक तकनीकों, सकारात्मक नीतियों तथा प्रसंस्करण एवं बाजार विस्तार के माध्यम से मखाना क्षेत्र में क्रांति आई है। मखाना अब केवल पारंपरिक फसल नहीं, बल्कि मिथिला की आर्थिक शक्ति बनकर उभर रहा है, जिससे मिथिला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों के लिए संस्थागत ऋण तक आसान पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि छोटे एवं सीमांत कृषक आधुनिक उत्पादन एवं प्रसंस्करण प्रणाली से जुड़ सकें। साथ ही गुणवत्तापूर्ण उत्पाद की पूरी मूल्य श्रृंखला में किसानों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने, बिचौलियों की भूमिका कम करने तथा किसानों को अधिक लाभ उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
भारतीय गुणवत्ता परिषद् के प्रतिनिधि शिवम शुक्ला एवं मोहम्मद सलीम ने मखाना क्षेत्र में हो रहे वैज्ञानिक एवं संस्थागत प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्ता आधारित विकास मॉडल तथा किसान केंद्रित मूल्य श्रृंखला के माध्यम से मखाना कृषकों की आय में और अधिक वृद्धि की जा सकती है। ज्ञात हो कि भारतीय गुणवत्ता परिषद् भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली एक प्रमुख स्वायत्त संस्था है, जिसका उद्देश्य देश में गुणवत्ता संवर्धन, मानकीकरण, प्रमाणन तथा गुणवत्ता आधारित विकास प्रणाली को मजबूत बनाना है।

