डेस्क:प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने पांच देशों के दौरे के दूसरे चरण के तहत शुक्रवार को नीदरलैंड पहुंचे, जहां वह व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने के लिए अपने डच समकक्ष रॉब जेटेन के साथ बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में लगभग ढाई घंटे के संक्षिप्त ठहराव के बाद नीदरलैंड पहुंचे। उन्होंने अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ वार्ता की। नीदरलैंड पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का हवाईअड्डे पर एडजुटेंट-जनरल और महामहिम राजा के सैन्य परिवार के प्रमुख रियर एडमिरल लुडगर ब्रुमेलार, डच विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन और नीदरलैंड में भारत के राजदूत कुमार तुहिन तथा डच सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने अपने आगमन के तुरंत बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “(मैं) एम्स्टर्डम पहुंचा हूं। नीदरलैंड की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते ने व्यापार और निवेश संबंधों को काफी गति प्रदान की है।”
उन्होंने कहा, “यह सेमीकंडक्टर, जल, स्वच्छ ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में संबंधों को गहरा करने का अवसर प्रदान करता है।” मोदी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री जेटेन से बातचीत करेंगे और राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वह इस यात्रा के दौरान एक सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए उत्सुक हैं। मोदी की 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की यह यात्रा 2017 की उनकी यात्रा के बाद दूसरी यात्रा है।
भारत-नीदरलैंड्स साझेदारी के और मज़बूत होने की उम्मीद
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरे से “बहुआयामी भारत-नीदरलैंड्स साझेदारी” के और मज़बूत होने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह दौरा मुख्य भूमि यूरोप में सबसे बड़े भारतीय प्रवासी समुदायों में से एक के साथ जुड़ने का अवसर भी प्रदान करेगा। अधिकारियों ने इस दौरे को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक “महत्वपूर्ण मोड़” पर आया हुआ बताया। PM मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा, जो 15 से 17 मई तक निर्धारित है, 2017 में अपनी पिछली यात्रा के बाद इस देश की उनकी दूसरी यात्रा है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इस दौरे का “एजेंडा बहुत समृद्ध और ठोस” है, और इससे हाल के वर्षों में भारत और नीदरलैंड्स के बीच लगातार जुड़ाव के माध्यम से बने रणनीतिक सहयोग के और मज़बूत होने की उम्मीद है।

