डेस्क: ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान पश्चिम एशिया संकट को लेकर बड़ा कूटनीतिक टकराव सामने आया। ईरान (Iran) और (United Arab Emirates) के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हो गई, जिसके बाद (Sergey Lavrov) को हस्तक्षेप कर माहौल शांत कराना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने यूएई पर आरोप लगाया कि उसने हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल को सैन्य और खुफिया सहायता उपलब्ध कराई। ईरान का दावा है कि यूएई ने अपने एयरबेस और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान विरोधी कार्रवाई के लिए होने दिया।
UAE ने भी किया पलटवार
वहीं यूएई की ओर से विदेश मामलों के राज्य मंत्री Khalifa Shaheen Almarar ने ईरान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हालिया संघर्ष में ईरान ने यूएई की जमीन और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। यूएई प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि उनके देश की सुरक्षा को सीधे खतरा पहुंचा।
बताया जा रहा है कि बैठक के एक सत्र में दोनों नेताओं के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि रूस के विदेश मंत्री लावरोव को बीच में आकर स्थिति संभालनी पड़ी।
क्यों नहीं जारी हो सका साझा बयान?
पश्चिम एशिया संकट को लेकर BRICS देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी। खासतौर पर ईरान और यूएई के मतभेदों के कारण समूह कोई संयुक्त बयान जारी नहीं कर पाया। भारत पहले भी सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर चुका था, लेकिन तीखे मतभेदों ने रास्ता रोक दिया।
क्या है पूरा विवाद?
यह तनाव 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए उस बड़े संघर्ष से जुड़ा है, जब United States और Israel ने ईरान पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। करीब 40 दिन तक चले इस संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया।
ईरान का कहना है कि उसने यूएई को नहीं, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। दूसरी ओर यूएई इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है।
नेतन्याहू की कथित मुलाकात से बढ़ा विवाद
हाल ही में ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि संघर्ष के दौरान Benjamin Netanyahu ने गुप्त रूप से यूएई नेतृत्व से मुलाकात की थी। हालांकि यूएई ने इन दावों को नकार दिया, लेकिन ईरान इस मुद्दे को लेकर लगातार नाराजगी जता रहा है।
भारत ने दिया शांति का संदेश
बैठक की मेजबानी कर रहे S. Jaishankar ने इस दौरान कूटनीति और संवाद पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्गों पर निर्बाध व्यापार बेहद जरूरी है। भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की।

