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‘धार भोजशाला मंदिर है…’ हाई कोर्ट ने हिंदू पक्ष की मांग पर लगाई मुहर ! पूजा की मिली अनुमति !

डेस्क : इंदौर हाई कोर्ट ने धार-भोजशाला कमालमौला-मस्जिद मामले पर बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने हिंदू पक्ष की दो जनहित याचिकाएं मंजूर कीं। हाई कोर्ट ने विवादित स्थल को मंदिर माना है और हिंदुओं को पूजा की अनुमति दे दी है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड भोजशाला को मंदिर साबित करते हैं। इंदौर हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की पीठ ने यह फैसला सुनाया।

इंदौर हाई कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट पर भरोसा जताया है और कहा, ”ऐतिहासिक साहित्य स्थापित करता है कि स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज से जुड़ा था। भोजशाला में संस्कृत शिक्षण केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर होने के संकेत मिले हैं। भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद के विवादित परिसर का धार्मिक चरित्र वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के रूप में तय किया जाता है। केंद्र सरकार और एएसआई भोजशाला मंदिर के प्रशासन व प्रबंधन के बारे में फैसला करें।” हिंदू पक्ष की मांग को मानते हुए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिमों को नमाज की इजाजत देने वाला ASI आदेश खारिज कर दिया।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर घोषित करते हुए वहां मुस्लिमों द्वारा नमाज अदा करने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए उन्हें मस्जिद निर्माण हेतु वैकल्पिक भूमि मांगने की अनुमति दी जा सकती है।

इंदौर उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, ”मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अगर प्रतिवादी संख्या-1 धार जिले में उपयुक्त भूमि आवंटन या मस्जिद निर्माण के लिए आवेदन प्रस्तुत करता है तो राज्य सरकार कानून के अनुसार उस आवेदन पर विचार कर सकती है।”

बेंच ने अपने आदेश में कहा, ”भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को संरक्षण और रखरखाव पर पूर्ण निगरानी एवं नियंत्रण का अधिकार होगा। वहीं, याचिकाकर्ताओं द्वारा देवी सरस्वती की प्रतिमा को लंदन संग्रहालय से वापस लाकर भोजशाला परिसर में स्थापित करने की मांग को लेकर सरकार के समक्ष कई मांगपत्र दिए गए हैं। सरकार इन अनुरोधों पर प्रतिमा को वापस लाने के संबंध में विचार कर सकती है।”

मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है।

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