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‘कठपुतली शासक चला रहे पाकिस्तान’, JSMM प्रमुख ने पाकिस्तानी आवाम और दुनिया को बताई सेना की असलियत

डेस्क: पाकिस्तान की सेना और सैन्य नेतृत्व को लेकर सिंधी राष्ट्रवादी संगठन जेएसएमएम के प्रमुख शफी बुरफत ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था लंबे समय से धार्मिक कट्टरवाद और आतंकवाद को संरक्षण देती रही है व देश की राजनीति, न्यायपालिका, मीडिया और अर्थव्यवस्था पर उसका गहरा नियंत्रण है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने विस्तृत बयान में बुरफत ने कहा कि पाकिस्तान में वास्तविक सत्ता हमेशा सेना के हाथों में रही है। उनके मुताबिक, सेना ने बार-बार लोकतांत्रिक सरकारों को गिराया, निर्वाचित नेताओं को सत्ता से हटाया, राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाला और असहमति की आवाज उठाने वालों को देश छोड़ने पर मजबूर किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में निर्वाचित सरकारों के बजाय सेना समर्थित कठपुतली शासकों के जरिए शासन चलाया जाता रहा है। बुरफत ने कहा कि सेना न केवल राजनीति, बल्कि मीडिया, न्यायपालिका और अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को भी नियंत्रित करती है।
जेएसएमएम प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख समय-समय पर खुद को राष्ट्रवादी नायक के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना देश में धार्मिक राष्ट्रवाद, सैन्य शक्ति के प्रदर्शन और उग्र राष्ट्रवादी बयानबाजी का इस्तेमाल अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए करती रही है।

बुरफत ने विशेष रूप से आसीम मुनीर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के खिलाफ दिए जाने वाले आक्रामक बयान, परमाणु धमकियां और अतिराष्ट्रवादी भाषण किसी जिम्मेदार सैन्य नेतृत्व की पहचान नहीं हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की बयानबाजी पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और असुरक्षा को उजागर करती है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था लंबे समय से डर, धार्मिक राष्ट्रवाद, स्थायी संघर्ष और वैचारिक हेरफेर को सत्ता बनाए रखने के साधन के रूप में इस्तेमाल करती रही है। बुरफत के अनुसार, यही कारण है कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होती गईं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगातार दबाव बढ़ता गया।
बुरफत ने पाकिस्तान को अप्राकृतिक राज्य संरचना बताते हुए आरोप लगाया कि सेना ने चुनावी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप किया, राजनीतिक दलों को प्रभावित किया और असहमति की आवाज को दबाने के लिए राज्य एजेंसियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों, छात्रों, बुद्धिजीवियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार समर्थकों को सेंसरशिप, हिरासत, जबरन गायब किए जाने, यातना और राजनीतिक धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि अदालतें, मीडिया संस्थान और निर्वाचित प्रतिनिधि भी सैन्य वर्चस्व की छाया में काम कर रहे हैं। बुरफत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने विभिन्न राजनीतिक गुटों और नागरिक सरकारों के जरिए अप्रत्यक्ष शासन की व्यवस्था बना रखी है।
जेएसएमएम प्रमुख ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि पाकिस्तान की सैन्य स्थापना ने चरमपंथी और आतंकी संगठनों को न केवल संरक्षण दिया, बल्कि पड़ोसी देशों को अस्थिर करने के लिए उनका इस्तेमाल भी किया। हालांकि, पाकिस्तान की सेना और सरकार पहले भी ऐसे आरोपों से इनकार करती रही है।

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