डेस्क:पाकिस्तान (Pakistan) में तहरीक-ए-तालिबान और बलूच लिबरेशन आर्मी (Tehrik-i-Taliban and Baloch Liberation Army) के बाद एक नया आतंकी संगठन इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन ने कोहराम मचाना शुरू कर दिया है. इस आतंकी संगठन की स्थापना एक साल पहले 11 अप्रैल, 2025 को हुई थी. रविवार को इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन ने बन्नू में पाकिस्तान के 15 सैानिकों की हत्या कर दी. सरकार के खिलाफ इस साल का यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है. वो भी तब, जब पाकिस्तान की सेना बन्नू के इलाकों को अपने कंट्रोल में रखने का दावा करती है.
तहरीक ए तालिबान की तरह ही इस आतंकी संगठन का मकसद पाकिस्तान में कट्टर इस्लामी शासन को स्थापित करना है. इस संगठन के अधिकांश आतंकवादी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह इलाके में एक्टिव हैं. बन्नू में हमले के बाद पाकिस्तान सरकार ने इस आतंकी संगठन को दंडित करने की बात कही है. बन्नू में इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन के आतंकियों ने सुसाइड हमले के जरिए घटना को अंजाम दिया. वहीं पाकिस्तान की सरकार ने इसके तार अफगानिस्तान से जोड़ने की कोशिश की है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अफगानिस्तान के इशारों पर आतंकियों ने इस वारदात को अंजाम दिया है.
इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन की पूरी कुंडली
बीबीसी मॉनिटरिंग के मुताबिक साल 2025 में खैबर इलाके में एक्टिव तीन आतंकी संगठनों ने एका का प्रस्ताव रखा. इसके तहत स्लामिक क्रांति, लश्कर-ए-इस्लाम और हाफिज गुल बहादुर का समूह ने एक नए आतंकी संगठन तैयार किया. इस संगठन का नाम इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन रखा गया. एक वक्त में हाफिज गुल संगठन को पाकिस्तान की सरकार ने गुड तालिबान की उपाधि दी थी.
इस आतंकी संगठन के हमलों या गतिविधियों का मुख्य केंद्र पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत है, जो अफगानिस्तान सीमा के करीब है. टेलीग्राम पर इस आतंकी संगठन का एक अकाउंट भी है, जहां पर पश्तो, उर्दू और अंग्रेजी में पोस्ट किए जाते हैं. आतंकी महमूदुल हसन को इस संगठन का प्रवक्ता माना जाता है. सेना के ऑपरेशन से बचने के लिए इस आतंकी संगठन में कोई सरगना नहीं है. इतना ही नहीं, पब्लिक डोमेन में इस आतंकी संगठन के बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं दी गई है.
पहले प्रचार किया, फिर बड़ा हमला
इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन ने गठन के बाद बन्नू में सबसे बड़ा हमला किया है. पिछले एक साल में इस आतंकी संगठन के टेलीग्राम पर सिर्फ प्रचार के वीडियो शेयर किए गए हैं. एक मामले में सैन्य ठिकानों को बर्बाद करने की धमकी दी गई थी. इसके प्रचार वीडियो में सैन्य ठिकानों को उड़ाने के बारे में दिखाया गया है. बन्नू में इस हमले के बाद इस आतंकी संगठन का दबदबा बढ़ सकता है. क्योंकि, हाल के दिनों में अफगानिस्तान के साथ समझौते की वजह से टीटीपी ने अपने हमले कम कर दिए हैं. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की स्थिति भी कमजोर है.

