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ब्रिटानिया के बिस्किट होंगे महंगे, पैकेट का वजन भी घटेगा

डेस्क: अगर आपकी सुबह की शुरुआत चाय और बिस्किट के बिना अधूरी है, तो अब आपको अपना बजट बढ़ाना पड़ सकता है. पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे तनाव का असर अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिंताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी आंच आपकी रसोई तक पहुंच चुकी है. देश की सबसे बड़ी बिस्किट निर्माता कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज (Britannia Industries) ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने और पैकेट का वजन कम करने का अहम फैसला किया है.
ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ रक्षित हरगवे ने निवेशकों के साथ हुई अर्निंग कॉल में स्पष्ट किया है कि कंपनी इस तिमाही से कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी करने जा रही है. इसका सीधा मतलब यह है कि 10 रुपये से ज्यादा कीमत वाले बिस्किट के पैकेट अब और महंगे हो जाएंगे. वहीं, छोटी कीमत वाले पैकेट्स के दाम न बढ़ाते हुए उनके अंदर मिलने वाले बिस्किट की मात्रा (ग्रामेज) कम की जाएगी. दरअसल, फैसला कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजों के बाद आया है. चौथी तिमाही में ब्रिटानिया का शुद्ध मुनाफा 21 फीसदी बढ़ा है, लेकिन राजस्व (4,686 करोड़ रुपये) बाजार के जानकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया. इसके चलते शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और शेयर 5,571 रुपये पर आ गए.

ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि सात समंदर पार चल रहे युद्ध से भारत में बिस्किट के दाम क्यों बढ़ रहे हैं. दरअसल, बिस्किट बनाने में इस्तेमाल होने वाले पाम ऑयल (ताड़ का तेल), पैकेजिंग के लिए लैमिनेट्स, ईंधन और मालभाड़े की लागत तेजी से बढ़ी है. पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन और कच्चे माल का खर्च बढ़ गया है. हालांकि, गेहूं की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन कुल लागत का भारी दबाव कंपनी के मुनाफे को चुनौती दे रहा है. सीईओ हरगवे के मुताबिक, कंपनी ने अगले पांच महीनों के लिए पाम ऑयल के सौदे पहले ही तय कर लिए हैं, जिससे वे अचानक आने वाले वित्तीय झटके से बचे हुए हैं. लेकिन लंबे समय में अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ रहा है.
युद्ध का नकारात्मक प्रभाव केवल भारत तक ही सीमित नहीं है. मार्च के महीने में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही ठप होने के कारण ब्रिटानिया का अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी प्रभावित हुआ. मालवाहक जहाजों की कमी के चलते कंपनी अपने उत्पाद विदेशों में नहीं भेज पाई, जिससे विदेशी रेवेन्यू और मुनाफे पर चोट लगी. इस चुनौती से निपटने के लिए ब्रिटानिया वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमतें बढ़ाने जा रही है. इसके अलावा, नॉर्थ अमेरिका की मांग को पूरा करने के लिए जो मैन्युफैक्चरिंग टैरिफ की वजह से ओमान शिफ्ट की गई थी, उसे अब धीरे-धीरे वापस भारत के मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) लाया जा रहा है ताकि सप्लाई चेन को सुधारा जा सके.
ब्रिटानिया की कुल बिक्री का करीब 60-65 फीसदी हिस्सा 5 और 10 रुपये वाले किफायती पैकेट्स से आता है. हाल ही में GST ट्रांजिशन के दौरान बाजार में एक अजीब स्थिति बन गई थी. कुछ प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने अपने उत्पाद 5 और 10 रुपये के बजाय 4.50 रुपये और 9 रुपये में बेचने शुरू कर दिए. इससे थोक और ग्रामीण बाजार (जो कुल बिजनेस का 25 फीसदी हैं) के दुकानदारों ने ज्यादा मार्जिन के लालच में दूसरी कंपनियों का माल ज्यादा स्टॉक किया.
इसका नतीजा यह हुआ कि ब्रिटानिया की बिक्री की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई. हालांकि, कंपनी ने अपनी कीमतें स्थिर रखीं. प्रबंधन को पूरा भरोसा है कि जैसे ही दूसरी कंपनियां अपनी सामान्य 5 और 10 रुपये की कीमतों पर वापस लौटेंगी, ब्रिटानिया की ग्रामीण बिक्री फिर से रफ्तार पकड़ लेगी. कंपनी का ई-कॉमर्स और शहरी रिटेल कारोबार अभी भी शानदार वृद्धि दर्ज कर रहा है.

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