अंतरराष्ट्रीय

अंतरिक्ष में बड़ी खोज: पृथ्वी से 30% बड़े ‘सुपर-अर्थ’ की पहली सतह की हुई स्टडी, जेम्स वेब टेलीस्कोप ने खोले रहस्य

डेस्क: अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) के क्षेत्र में वैज्ञानिकों (Scientists) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पहली बार किसी दूरस्थ चट्टानी ग्रह (Rocky Planet) की सतह का इतने विस्तार से अध्ययन किया गया है। यह खोज जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से संभव हुई है, जिसमें एलएचएस 3844 बी (LHS 3844 B) नामक ग्रह का विश्लेषण किया गया।
शोध के अनुसार यह ग्रह पृथ्वी से करीब 48.5 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और आकार में पृथ्वी से लगभग 30 प्रतिशत बड़ा है। इसे सुपर-अर्थ श्रेणी में रखा गया है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह ग्रह अत्यधिक गर्म, अंधकारमय और जीवन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुआ है।
क्या है सुपर-अर्थ?
सुपर-अर्थ वे ग्रह होते हैं जो आकार में पृथ्वी से बड़े होते हैं, लेकिन गैस दानव ग्रहों जितने विशाल नहीं होते। एलएचएस 3844 बी अपने तारे के बेहद करीब घूमता है और मात्र 11 घंटे में एक पूरा चक्कर लगा लेता है।

ग्रह पर नहीं मिला कोई वातावरण
सबसे अहम खोज यह रही कि इस ग्रह पर किसी तरह का वातावरण मौजूद नहीं है। न तो गैसीय परत है और न ही ऐसी कोई संरचना जो तापमान को नियंत्रित कर सके। इसके कारण यह ग्रह सीधे अंतरिक्षीय विकिरण और उल्कापिंडों के प्रभाव में रहता है।
सतह हो सकती है ज्वालामुखीय चट्टानों से बनी
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसकी सतह पृथ्वी जैसी नहीं बल्कि बेसाल्ट चट्टानों से बनी हो सकती है। ये चट्टानें ज्वालामुखीय लावा के ठंडा होने से बनती हैं, जो ग्रह को एक कठोर और निर्जीव स्वरूप देती हैं।
जेम्स वेब के MIRI उपकरण की भूमिका
इस अध्ययन में जेम्स वेब टेलीस्कोप के मिड-इंफ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (MIRI) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस उपकरण ने ग्रह की सीधी तस्वीर नहीं ली, बल्कि ग्रह और उसके तारे से आने वाली रोशनी के सूक्ष्म बदलावों का विश्लेषण किया। वैज्ञानिकों ने 5 से 12 माइक्रोमीटर तरंगदैर्ध्य वाली इन्फ्रारेड किरणों का अध्ययन कर एक स्पेक्ट्रल डेटा तैयार किया, जिससे ग्रह की सतह और तापीय गुणों का पता लगाया जा सका।
क्यों है यह खोज खास?
यह पहली बार है जब किसी दूरस्थ चट्टानी ग्रह की सतह और संरचना का इतना गहराई से अध्ययन किया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह तकनीक भविष्य में अन्य ग्रहों के भूगर्भीय इतिहास और संरचना को समझने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *