डेस्क: 365 दिन बाद भी ऑपरेशन सिंदूर के सदमे से पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन बाहर नहीं निकल पाया है. एक तरफ पाकिस्तान की सरकार ऑपरेशन सिंदूर के तहत बंद किए गए पानी को लेकर परेशान है. वहीं दूसरी तरफ एयरस्ट्राइक के डर से हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे बड़े-बड़े आतंकी अभी भी अंडरग्राउंड छिपे हैं. पिछले एक साल में सार्वजनिक तौर पर इन आतंकियों की कोई भी तस्वीर सामने नहीं आई है. मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद तो हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हैं. दोनों को पाकिस्तान का सबसे बड़ा आतंकी माना जाता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन्हीं दोनों के ठिकानों पर सबसे ज्यादा हमले किए गए थे.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर, जैश और हिजबुल के 10 ठिकानों को भारतीय सेना ने ध्वस्त किया था. इससे ये आतंकी संगठन अब तक नहीं उबर पाए हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद लश्कर और जैश ने अपने आतंकी ठिकानों को नए सिरे से तैयार करने की घोषणा जरूर की, लेकिन अब तक उसमें सफलता नहीं मिली.
इतना ही नहीं, पिछले एक साल में हाफिज सईद और मसूद अजहर के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. इसके उलट लश्कर और जैश के बड़े बड़े कमांडर अज्ञात हमलावरों के हमले में मारे जा रहे हैं. पिछले दिनों लश्कर के को-फाउंडर रहे हमजा की लाहौर में हत्या कर दी गई.
आर्थिक तौर पर भी लश्कर और जैश की स्थिति ठीक नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सरकार ने मसूद के परिवार को राहत के तौर पर 14 करोड़ रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की थी. दरअसल, भारत के स्ट्राइक में मसूद परिवार के 14 लोगों की मौत हुई थी. इन दोनों आतंकी संगठनों के अलावा हिजबुल की स्थिति भी कमजोर है. हिजबुल के कमांडर सज्जाद अहमद की हाल ही में हत्या कर दी गई है.

