डेस्क: पश्चिम एशिया में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. ईरान की मीडिया फार्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोत पर दो मिसाइलें दागी गईं. दावा किया गया है कि यह हमला तब हुआ जब अमेरिकी जहाज ने ईरान की चेतावनी को नजरअंदाज किया. हालांकि, इस दावे के एक घंटे बाद अमेरिका ने ऐसे किसी भी अटैक से इनकार किया है. ईरान की सरकारी एजेंसी ने दावा किया कि उसकी नौसेना ने ‘दुश्मन विध्वंसकों’ को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रवेश करने से रोक दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कड़ी चेतावनी जारी की थी और उसके बाद अमेरिकी और इजरायली जहाजों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया. ईरान का कहना है कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा उसके नियंत्रण में है और यहां किसी भी विदेशी सैन्य मौजूदगी को वह स्वीकार नहीं करेगा.
इस घटनाक्रम से पहले ईरान ने साफ कहा था कि अगर कोई विदेशी सेना, खासकर अमेरिका, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के करीब आएगी या उसमें प्रवेश करने की कोशिश करेगी, तो उस पर हमला किया जाएगा. ईरान के प्रमुख सैन्य कमान खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने बयान जारी कर कहा था कि यह इलाका उसकी निगरानी में है और बिना समन्वय के किसी भी सैन्य गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ईरान ने यह धमकी अमेरिका के
दूसरी तरफ, अमेरिका ने इस जलमार्ग में फंसे जहाजों को निकालने और व्यापारिक आवाजाही बहाल करने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है. अमेरिकी सेंटकॉम के मुताबिक, 4 मई से शुरू हुए इस मिशन का मकसद ‘निर्दोष और तटस्थ जहाजों’ को सुरक्षित रास्ता देना है. इस ऑपरेशन में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक, 100 से ज्यादा विमान, ड्रोन और करीब 15,000 सैनिक शामिल किए गए हैं. सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि यह मिशन वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है.

