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NASA के सैटेलाइट ने अंतरिक्ष से कैद की सुनामी की असली तस्वीर, लहरों के व्यवहार को लेकर टूटी पुरानी धारणा

डेस्क: प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में उठी एक विशाल सुनामी (Tsunami) को पहली बार अंतरिक्ष (Space) से इतनी स्पष्टता के साथ रिकॉर्ड किया गया है कि वैज्ञानिक भी चकित हैं। नासा (NASA) के अत्याधुनिक सैटेलाइट ने इन लहरों की ऐसी तस्वीरें कैद की हैं, जिनसे पता चलता है कि सुनामी कोई एक सीधी और समान लहर नहीं होती, बल्कि रास्ते में बदलती हुई जटिल ऊर्जा का रूप लेती है।
‘द सीस्मिक रिकॉर्ड’ में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, यह अहम अवलोकन NASA और CNES के संयुक्त मिशन सरफेस वाटर एंड ओशन टोपोग्राफी (SWOT) के जरिए संभव हुआ। इस सैटेलाइट ने 29 जुलाई को कामचटका प्रायद्वीप के पास कुरिल-कामचटका सबडक्शन जोन में आए 8.8 तीव्रता के भूकंप से उत्पन्न सुनामी को विस्तार से रिकॉर्ड किया। यह भूकंप 1900 के बाद के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में छठे स्थान पर माना जा रहा है।
NASA के मुताबिक, SWOT सैटेलाइट को पृथ्वी के जल स्रोतों की सतह की ऊंचाई मापने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे पहले वैज्ञानिकों को सुनामी से जुड़ी जानकारी मुख्यतः DART सिस्टम जैसे समुद्री उपकरणों से मिलती थी, जो सीमित स्थानों से ही डेटा प्रदान करते थे। अब यह सैटेलाइट करीब 120 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में एक साथ समुद्र की सतह को स्कैन कर सकता है, जिससे सुनामी की पूरी संरचना को समझना आसान हो गया है।

पूर्वानुमान मॉडल में बदलाव के संकेत
नए सिमुलेशन, जिनमें लहरों के बिखराव को शामिल किया गया, वे वास्तविक आंकड़ों के अधिक करीब पाए गए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मौजूदा सुनामी पूर्वानुमान मॉडल में सुधार की आवश्यकता है।
सुनामी की नई समझ
यूनिवर्सिटी ऑफ आइसलैंड के वैज्ञानिक एंजेल रुइज-एंगुलो के अनुसार, यह तकनीक समुद्र को एक नई नजर से देखने का मौका देती है। पहले यह माना जाता था कि बड़ी सुनामी एक ही लहर के रूप में आगे बढ़ती है, लेकिन नए डेटा से यह धारणा गलत साबित हुई है।
सैटेलाइट के आंकड़ों से पता चला है कि सुनामी की ऊर्जा अलग-अलग दिशाओं में फैलती है और कई छोटी लहरों में बंट जाती है। इस प्रक्रिया को डिस्पर्शन कहा जाता है। सरल शब्दों में, सुनामी एक स्थिर लहर नहीं बल्कि लगातार बदलती हुई गतिशील प्रणाली है।
जब वैज्ञानिकों ने इस नए डेटा की तुलना पारंपरिक कंप्यूटर मॉडल से की, तो पाया कि पुराने मॉडल वास्तविक स्थिति को पूरी तरह दर्शाने में सक्षम नहीं थे। यह खोज भविष्य में सुनामी की बेहतर भविष्यवाणी और चेतावनी प्रणाली विकसित करने में मददगार साबित हो सकती है।

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