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होर्मुज विवाद पर चीन की एंट्री: अमेरिका-ईरान दोनों को नसीहत, समुद्री रास्ता खोलने पर जोर

डेस्क: पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने पहली बार खुलकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर अपना रुख सामने रखा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए सभी पक्षों से इसे जहाजों के लिए फिर से खोलने की अपील की है।

शी जिनपिंग ने मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत में कहा कि होर्मुज में सामान्य नौवहन बहाल होना जरूरी है। उनके मुताबिक, यह कदम न सिर्फ क्षेत्रीय देशों बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में है।

क्यों अहम है चीन का बयान?

ईरान द्वारा जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध और संयुक्त राज्य अमेरिका की जवाबी नाकाबंदी के बाद यह बीजिंग की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है।
होर्मुज बंद होने से खासकर एशिया में ऊर्जा संकट गहराया है, क्योंकि चीन ईरानी तेल का बड़ा आयातक है।

अमेरिका की कार्रवाई पर जताई चिंता

चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नौसेना द्वारा एक चीनी-सम्बद्ध जहाज को रोके जाने और उस पर कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई। प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और हालात को बिगड़ने से रोकना चाहिए।

“अंतरराष्ट्रीय मार्ग है, खुला रहना चाहिए”

चीन ने साफ शब्दों में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है, जिसे सुरक्षित और निर्बाध रखना सभी देशों के साझा हित में है।

भारत से जुड़े सवाल पर भी जवाब

भारतीय झंडे वाले जहाजों पर हमले के सवाल पर भी चीन ने अपना वही रुख दोहराया—कि इस जलमार्ग को हर हाल में खुला और सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

कूटनीति के संकेत

गौरतलब है कि चीन पहले भी पश्चिम एशिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है। 2023 में उसने ईरान और सऊदी अरब के बीच रिश्ते बहाल कराने में अहम भूमिका निभाई थी।
चीन का यह बयान साफ संकेत देता है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर किसी एक पक्ष के बजाय वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से समाधान चाहता है—और चाहता है कि अमेरिका और ईरान दोनों टकराव से पीछे हटें।

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