डेस्क: वैश्विक भू-राजनीतिक हलचल के बीच अमेरिका और इंडोनेशिया (America and Indonesia) के बीच प्रस्तावित एक संवेदनशील रक्षा समझौता विवादों में घिर गया है। भारतीय मीडिया रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद इस कथित ‘सीक्रेट एयरस्पेस डील’ (Secret Airspace Deal) पर बवाल मच गया और अंततः दोनों देशों को कदम पीछे खींचने पड़े।
बताया जा रहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने थे। लेकिन इससे एक दिन पहले सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका को इंडोनेशिया के एयरस्पेस में सैन्य विमानों के निर्बाध संचालन की अनुमति देने की योजना थी।
यह खुलासा होते ही इंडोनेशिया में राजनीतिक हलचल तेज हो गई और सरकार को सफाई देनी पड़ी।
क्या था प्रस्ताव?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव के तहत अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में विशेष परिस्थितियों में खुली पहुंच मिल सकती थी। आधिकारिक तौर पर इसे आपात स्थिति के लिए बताया गया, लेकिन रणनीतिक रूप से इसका मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में निगरानी बढ़ाना माना जा रहा था।
खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका मलक्का जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता था।
शीर्ष स्तर पर हुई थी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर फरवरी में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत हुई थी। इसे बाद में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में औपचारिक रूप देने की योजना थी।
विरोध के बाद बदला रुख
जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, जकार्ता में सांसदों और विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया। संसद के नेताओं ने इसे देश की संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सवाल उठाए।
बढ़ते दबाव के बीच इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी विमानों को एयरस्पेस देने का प्रस्ताव अंतिम समझौते का हिस्सा नहीं है। इसे केवल प्रारंभिक स्तर (लेटर ऑफ इंटेंट) की चर्चा बताया गया।
रणनीतिक महत्व क्यों था?
इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद अहम बनाती है। मलक्का जलडमरूमध्य के करीब होने के कारण यह वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ऐसे में अमेरिका के लिए यह डील इंडो-पैसिफिक में अपनी मौजूदगी मजबूत करने और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
फिलहाल ठंडे बस्ते में डील
विवाद और घरेलू दबाव के बाद यह समझौता फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। इंडोनेशिया ने साफ किया है कि किसी भी रक्षा सहयोग में उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेंगे।

