डेस्क: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने देश की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव किया है। इस प्रक्रिया में जहां 12 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों से 7.2 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए, वहीं करीब 2 करोड़ नए मतदाता भी जोड़े गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर शुद्ध रूप से लगभग 5.2 करोड़ नाम अंतिम सूची से बाहर हो गए हैं।
एसआईआर के बाद इन राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 45.8 करोड़ रह गई है, जबकि पहले यह आंकड़ा करीब 51 करोड़ था। यानी लगभग 10.2 फीसदी मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं।
यूपी में सबसे ज्यादा बदलाव
उत्तर प्रदेश इस प्रक्रिया में सबसे आगे रहा।
नए मतदाताओं के जुड़ने में यूपी 92.4 लाख के साथ शीर्ष पर है।
वहीं हटाए गए नामों में भी यूपी पहले स्थान पर है, जहां 2.04 करोड़ नाम सूची से हटे।
इसके अलावा:
तमिलनाडु: 35 लाख नए जुड़े, 97 लाख हटे
केरल: 20.4 लाख नए जुड़े
राजस्थान: 15.4 लाख नए जुड़े
मध्य प्रदेश: 12.9 लाख नए जुड़े
गुजरात: 12.1 लाख नए जुड़े
पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा विवाद
पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर सबसे ज्यादा सियासी घमासान देखने को मिला।
60 लाख से अधिक लोगों की जांच हुई
27 लाख नाम सत्यापन में हटे
6 लाख नाम आपत्तियों के आधार पर हटाए गए
कुल मतदाता संख्या घटकर 6.75 करोड़ रह गई (पहले 7.66 करोड़)
क्यों हटाए गए इतने नाम?
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार:
66.9 लाख नाम मृत्यु के कारण हटे
1.3 करोड़ नाम डुप्लीकेट (एक से अधिक जगह पंजीकरण) पाए गए
1.3 करोड़ लोग पते पर नहीं मिले
3.1 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो चुके थे
12.7 लाख नाम अन्य कारणों से हटाए गए
क्या है इसका असर?
एसआईआर के इस बड़े अभियान से मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस भी तेज हो गई है। कई राज्यों में इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
कुल मिलाकर, यह प्रक्रिया आने वाले चुनावों की दिशा और रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।

