डेस्क: आजकल ज्यादातर स्मार्टफोन कंपनियां बॉक्स से चार्जर गायब कर चुकी हैं। ऐसे में जब आप नया चार्जर खरीदने बाजार जाते हैं, तो असली और नकली की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके चार्जर के पीछे छिपा एक छोटा सा कोड ‘R-Number’ आपको बड़े नुकसान से बचा सकता है?
क्या है यह ‘R’ Code का रहस्य?
अगर आप चार्जर को पलटकर देखेंगे, तो उस पर ‘R’ से शुरू होने वाला एक कोड (जैसे R-XXXXXXXX) और BIS का लोगो दिखाई देगा। यह कोई साधारण नंबर नहीं, बल्कि Bureau of Indian Standards (BIS) द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक रजिस्ट्रेशन कोड है। यह कोड दर्शाता है कि चार्जर को भारत सरकार के कड़े सुरक्षा मानकों पर टेस्ट किया गया है। इसका मतलब है कि चार्जर ओवरहीटिंग, शॉर्ट-सर्किट और हाई-वोल्टेज जैसी समस्याओं से निपटने में सक्षम है।
असली और नकली की पहचान कैसे करें?
नकली चार्जर बनाने वाले अक्सर फर्जी BIS लोगो लगा देते हैं, लेकिन आप इसकी सच्चाई मिनटों में जान सकते हैं:
BIS Care App: अपने फोन में यह सरकारी ऐप डाउनलोड करें।
Verify R-No: ऐप में ‘Verify R-No’ वाले सेक्शन में जाएं।
विवरण देखें: चार्जर पर लिखा ‘R’ कोड दर्ज करें। अगर चार्जर असली है, तो निर्माता का नाम, ब्रांड और प्रोडक्ट की पूरी जानकारी आपके सामने आ जाएगी।
नकली चार्जर क्यों है खतरनाक?
बिना R-Number वाला सस्ता चार्जर आपके लिए महंगा साबित हो सकता है:
बैटरी ब्लास्ट: घटिया कंपोनेंट्स के कारण चार्जर या फोन की बैटरी फट सकती है।
स्लो चार्जिंग: ये चार्जर आपके फोन को नुकसान पहुंचाते हैं जिससे बैटरी बैकअप कम हो जाता है।
करंट का खतरा: इंसुलेशन खराब होने की वजह से आपको बिजली का झटका लग सकता है।
अगली बार चार्जर खरीदते समय उसकी चमक-धमक या कम कीमत पर न जाएं। चार्जर के पीछे R-Number जरूर चेक करें। यह छोटा सा कदम आपके कीमती फोन और आपकी सुरक्षा, दोनों के लिए जरूरी है।

