डेस्कः अमेरिका-इज़राइल-ईरान जंग के 24 दिन पूरे हो गए हैं। एक तरफ कूटनीतिक बातचीत की हलचल तेज हुई है, तो दूसरी तरफ सैन्य गतिविधियां भी जारी हैं। मध्य पूर्व में तनाव के बीच इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलग-अलग रुख ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
ट्रंप ने हमला टाला, बातचीत पर जोर
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 23 तारीख को बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले को 5 दिन के लिए टाल दिया और कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता जारी है। यानी अमेरिका फिलहाल बातचीत से समाधान चाहता है।
नेतन्याहू का सख्त बयान
ट्रंप से फोन पर बात करने के बाद इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने कहा कि हम ईरान और लेबनान पर हमले लगातार जारी रखेंगे, यह रुकने वाला नहीं है, हम अपने हितों की हर हाल में रक्षा करेंगे।
हमलों से क्या हुआ असर?
नेतन्याहू के मुताबिक ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को नुकसान पहुंचा, Hezbollah को भारी झटका लगा। उन्होंने हाल ही में 2 ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराने का दावा भी किया है।
अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते मतभेद
यह स्थिति साफ दिखाती है कि अमेरिका बातचीत और समझौता चाहता है जबकि इजराइल सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है। दोनों के लक्ष्य अलग-अलग नजर आ रहे हैं।
ईरान के पास कितना परमाणु खतरा?
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के पास 60% से ज्यादा समृद्ध करीब 400 किलो यूरेनियम है। इससे 10-11 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं।
इज़राइल को ‘खराब डील’ का डर
इज़राइली सूत्रों का कहना है कि जल्दबाजी में ऐसा समझौता हो सकता है जो उनके हित में न हो और अगर यूरेनियम खत्म नहीं हुआ, तो समझौता बेकार होगा।
