डेस्क:काबुल पर बरसी आग, पाकिस्तान का हमला और भारत की मानवीय मदद, यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती रणनीतिक तस्वीर का खतरनाक संकेत है। सोलह मार्च की रात, जब रमजान का पाक महीना चल रहा था और लोग इबादत में डूबे थे, उसी समय पाकिस्तान की वायु सेना ने काबुल के एक नशा मुक्ति केंद्र पर बम बरसाकर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। इस हमले में चार सौ से अधिक लोग मारे गए और ढाई सौ से ज्यादा घायल हुए। यह कोई साधारण लक्ष्य नहीं था, बल्कि दो हजार बिस्तरों वाला वह केंद्र था जहां समाज के सबसे कमजोर और बेबस लोग इलाज करा रहे थे।
