पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव की पांचवीं सीट पर सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। वोटिंग के दौरान कांग्रेस के दो विधायक अनुपस्थित रहने से पूरे चुनाव का गणित उलझ गया है। ऐसे में न तो NDA और न ही महागठबंधन को साफ बहुमत मिलता दिख रहा है, जिससे मुकाबला बराबरी पर अटक गया है।
दरअसल, अगर कांग्रेस के दोनों विधायक वोट डालते तो महागठबंधन के पास कुल 40 वोट हो जाते, जबकि NDA के खाते में 38 वोट हैं। इसके अलावा बसपा के एक विधायक का वोट अलग है। इस स्थिति में भी जीत के लिए जरूरी आंकड़ा 40 ही रहता, जिससे मुकाबला काफी करीबी हो जाता।
लेकिन अगर कांग्रेस के दोनों विधायक वोट नहीं डालते हैं तो समीकरण पूरी तरह बदल जाता है। ऐसी स्थिति में महागठबंधन के पास 38 वोट रह जाएंगे और NDA के पास भी 38 वोट ही होंगे। यानी दोनों पक्षों के बीच सीधी बराबरी हो जाएगी और चुनाव बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच जाएगा।
इस पूरे मुकाबले में बसपा के चैनपुर से विधायक सतीश कुमार का एक वोट अचानक बेहद अहम हो गया है। अगर उनका वोट किसी एक पक्ष को मिलता है तो उस गठबंधन के वोट 39 हो जाएंगे, लेकिन तब भी जीत के लिए जरूरी 40 का आंकड़ा पूरा नहीं होगा।
ऐसी स्थिति में चुनाव का फैसला सीधे नहीं हो पाएगा। तब राज्यसभा चुनाव के नियमों के मुताबिक दूसरी वरीयता (सेकेंड प्रेफरेंस) के वोटों की गिनती की जाएगी। उसी के आधार पर तय होगा कि पांचवीं सीट पर किस उम्मीदवार की जीत होगी।
राजनीतिक गलियारों में इस सीट को लेकर हलचल तेज है, क्योंकि एक-एक वोट का महत्व बढ़ गया है। ऐसे में अब सभी की नजरें बसपा विधायक और दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती पर टिकी हुई हैं, जो इस चुनाव का अंतिम परिणाम तय कर सकती हैं।
आशुतोष झा
