डेस्क:आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में जो हुआ, वह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है—जहाँ सुबह की चाय और बच्चों का दूध ‘धीमा जहर’ बनकर घरों में दाखिल हुआ। वरलक्ष्मी मिल्क डेरी से निकले उस मिलावटी दूध ने देखते ही देखते 12 घरों के चिराग बुझा दिए। यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक नृशंस सामूहिक हत्याकांड जैसा है, जहाँ मुनाफे के लालच में दूध में घातक रसायन मिला दिए गए। अस्पताल के वार्डों में तड़पते बुजुर्ग, पेशाब रुकने से फूलते शरीर और उल्टियों के बीच अपनी आखिरी सांसें गिनते मासूमों ने पूरे राज्य को दहशत में डाल दिया है। क्या अब हम अपने बच्चों को दूध पिलाने से पहले सौ बार नहीं सोचेंगे? इस खौफनाक कांड ने साबित कर दिया है कि हमारी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। आज 12 मौतें हुई हैं, लेकिन सवाल यह है कि इस वक्त कितने और घरों में यह ‘सफेद मौत’ खौल रही है? पूरा इलाका किसी श्मशान जैसी शांति और गहरे तनाव की चपेट में है, जहाँ हर दरवाजा खटखटाने वाला दूधवाला अब एक कातिल की तरह नजर आ रहा है।
