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कांग्रेस से भाजपा तक 5 दशक का सफर, जानिए सियासी उतार-चढ़ाव

डेस्क:आज यानी की 11 मार्च को पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। अमरिंदर सिंह ने अपने 53 साल के लंबे करियर में कांग्रेस, अकाली दल और अपनी खुद की पार्टियों को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी। पंजाब में अमरिंदर सिंह की छवि ऐसे नेता की रही है, जो कभी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर अमरिंदर सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में जन्म और परिवार
पटियाला राजघराने में 11 मार्च 1942 को अमरिंदर सिंह का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम महाराज यादविंदर सिंह था और उनकी मां का नाम मोहिंदर कौर था। साल 1964 में अमरिंदर सिंह का विवाह परनीत कौर से हुआ था। अमरिंदर सिंह के परिवार का सियासत से पुराना नाता रहा है। साल 1963 में नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पढ़ाई के बाद अमरिंदर सिंह ने भारतीय सेना ज्वॉइन की थी।

लेकिन साल 1965 की शुरूआत में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। हालांकि पाकिस्तान युद्ध शुरू होने से पहले उन्होंने एक बार फिर सेना ज्वॉइन कर ली। साल 1965 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध में बतौर कैप्टन युद्ध लड़ा और युद्ध के बाद फिर उन्होंने सेना छोड़ दी।

राजनीतिक सफर
कैप्टन अमरिंदर सिंह को राजीव गांधी कांग्रेस में लेकर आए थे। क्योंकि राजीव और अमरिंदर स्कूल के दोस्त थे। साल 1980 में पहली बार अमरिंदर सिंह ने लोकसभा चुनाव जीता। फिर साल 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में उन्होंने लोकसभा और कांग्रेस दोनों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने शिरोमली अकाली दल की सदस्या ली। अमरिंदर सिंह ने राज्य विधानसभा चुनाव लड़ा और राज्य सरकार में मंत्री बन गए।

साल 1992 में अमरिंदर सिंह का अकाली दल से मोहभंग हुआ और उन्होंने शिरोमणी अकाली दल (पी) के नाम से नई पार्टी बनाई। साल 1998 में इस पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया। हालांकि विलय विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद हुआ। इस विधानसभा सीट से अमरिंदर सिंह को कुल 856 वोट मिले।

पंजाब के सीएम
कांग्रेस में शामिल होने के बाद साल 1999 से लेकर 2002 तक और 2010 से लेकर 2013 तक अमरिंदर सिंह पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। इस दौरान वह साल 2002 से लेकर 2007 तक वह पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद 16 मार्च 2017 से लेकर 19 सितंबर 2021 तक वह पंजाब के सीएम रहे।

भाजपा में शामिल
पार्टी प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू लंबे समय तक विवाद के बाद नवंबर 2021 में अमरिंदर सिंह ने पंजाब के सीएम पद और कांग्रेस दोनों को छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का गठन किया। हालांकि उनकी पार्टी को विधानसभा चुनाव में जबरदस्त हार मिली। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह भी अपनी सीट पर हार गए। पार्टी के करीब 11 महीने बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में करा लिया।

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