
दरभंगा। मिल्लत कॉलेज, दरभंगा और एमकेएस कॉलेज चंदौना के आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘यूजर अवेयरनेस ऑन इनफ्लीबनेट एंड आईआरआईएनएस सर्विसेज’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला दीप जलाकर शुरू की गई विवि कुलगीत के साथ किया गया। स्वागत व्याख्यान देते हुए प्राचार्य, कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं समन्वयक डॉ. सिद्धार्थ शंकर सिंह ने गायत्री मंत्रोच्चार के साथ कहा इनफ्लीबनेट का स्वरूप बदल गया है इसका व्यापक स्वरूप है। इसकी उपयोगिता तकनीक के विभिन्न आयामों के माध्यम से शोध कार्य में किया जा सकता है। वर्तमान समय में शोध को एक नया आयाम देने के लिए इनफ्लीबनेट,आईआरआईएनएस की महति भूमिका है। बीयूएचएस के कुलपति,आइजीआइएमएस पटना के निदेशक प्रो. बिंदे कुमार इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि थे, उन्होंने अपने संबोधन में शोध प्रक्रिया एवं शोध की विभिन्न प्रविधियों की विस्तृत व्याख्या की। शोध की संस्कृति सामाजिक उन्नयन एवं बौद्धिक विकास के लिए अति आवश्यक है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति, प्रो शाहिद हसन ने कहा वर्तमान शोध परिदृश्य में इनफ्लीबनेट एन्ड आईआरआईएनएस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. दिव्या रानी हंसदा ने अपने वक्तव्य में कहा शोध संबंधी कार्य इनफ्लीबनेट की सहायता से सरल एवं सुगम तरीके से किया जा सकता है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर एवं डब्ल्यूआइटी के निदेशक प्रो. अजय नाथ झा ने अपने वक्तव्य में कहा इस कार्यशाला की उपयोगिता सभी के लिए है,शिक्षक,शोधार्थी,विद्यार्थी सभी इससे लाभान्वित होंगे। शोध की बारीकियों को समझने के लिए यह अति आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है। साइंटिस्ट-ई इनफ्लीबनेट सेंटर गांधीनगर, गुजरात के डॉ. अभिषेक कुमार ने कहा वर्तमान समय में तकनीकी क्रांति ने सूचना के संचार को इतना सरल बना दिया है के शोध से संबंधित तमाम सामग्री एक ही प्लेटफार्म पर उपलब्ध हो जाते हैं। उन्होंने ओएनओएस की भूमिका के संदर्भ में विस्तृत सूचना साझा की तथा ई-कंटेंट एवं ई-लर्निंग के बारे में विस्तार से बताया। इनफ्लीबनेट सेंटर के साइंटिस्ट-सी, रंजन कुमार ने भारत में शोध की वर्तमान स्थिति एवं उसके सुधार की संभावनाओं के बारे में विस्तार से बताया। धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष, डॉ. मुस्तफा कमाल अंसारी ने किया। मंच संचालन, आइक्यूएसी समन्वयक डॉ. वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने किया। कार्यशाला के कार्यक्रम सचिव, डॉ. मुदस्सिर हसन भट्ट एवं सह कार्यक्रम सचिव डॉ संजय हजारा, कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सुभाष कुमार, डॉ. सुनीता झा, डॉ. कीर्ति चौरसिया , डॉ. जमशेद आलम, डॉ. मुन्ना साह, डॉ. शाहनवाज आलम, डॉ. निशा कुमारी डॉ. अब्दुस्सलाम जिलानी, डॉ. अथर सादिक, डॉ. जावेद अख्तर व अन्य कॉलेज अध्यापकों में डॉ. विक्रम कुमार पासवान, डॉ. गजेन्द्र भारद्वाज, डॉ राजकिशोर पासवान डॉ. कामेश्वर पासवान, डॉ. आलोक प्रभात, डॉ. संतोष कुमार, चंद्रशेखर आजाद तथा बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र छात्राए शामिल हुए।