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यश का क्षय होना मृत्यु समान है : कौशिक चैतन्य

– इक्यावन शक्ति पीठ मंदिर में श्रीमद भागवत कथा सुनने उमड़े भक्त
– लेटे हुए हनुमान मंदिर के महंत डॉ विवेक तांगरी ने दिया उद्बोधन

बीकेटी/लखनऊ। व्यास पीठ से ब्रह्मचारी कौशिक चैतन्य जी महाराज ने कहा कि किसी का समय या असमय अंत हो जाना ही मृत्यु नहीं है, बल्कि किसी यशस्वी व्यक्ति के यश का जब क्षय हो जाता है। उसका मान मर्दन हो जाता है। उसका पराभव हो जाता है। एक तरह से तब भी उसकी मृत्यु हो जाती है।
इक्यावन शक्ति पीठ मंदिर प्रांगण में हो रही श्रीमद भागवत कथा का सोमवार को दूसरा दिन था। इस सात दिवसीय भागवत कथा में लखनऊ शहर के अलावा आसपास के गांवों के सैकड़ों भक्तों ने हिस्सा लिया।
इस धार्मिक अनुष्ठान में कथा यजमान पुष्पा दीक्षित, कथा संयोजक तृप्ति तिवारी एवं वरद तिवारी, कथा व्यवस्थापक तनय तिवारी, स्तुति तिवारी, आचार्य धनंजय पाण्डेय, गीता पाण्डेय, समाजसेवी नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान व नमन तिवारी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
दूसरे दिन की कथा में लेटे हुए हनुमान मंदिर के महंत डॉ विवेक तांगरी ने विशेष उदबोधन दिया। उन्होंने कहा कि पुण्य आत्माओं को ही भागवत कथा कहने-सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
कथा क्रम में कौशिक चैतन्य जी महराज ने कहा कि कलयुग में हर किसी को आनन्द और संतुष्टि की तलाश है। लेकिन, हम सब संतुष्टि और प्रसन्नता को बाहर खोज रहे हैं। हमें आंनद और संतुष्टि की खोज अपने भीतर करनी चाहिए। हमें असीम आंनद और परम संतुष्टि तक पहुंचने के लिए प्रेम और भक्ति का पथ पकड़ना होगा। भक्ति ही संतुष्टि का मार्ग प्रशस्त करती है।
इस धार्मिक समागम में भाजपा नेता संजय सिंह, समाजसेवी ऋद्धि गौड़, ओज कवि योगेश चौहान, संध्या त्रिपाठी व समाजसेवी इंदल यादव आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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