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दरभंगा : अखिल भारतीय शलाका परीक्षा में नैवेद्या को मिला गोल्ड मेडल, दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए देश के 40 प्रतिभागी

पहले भी पुरस्कृत हो चुकी है दरभंगा जूनियर पब्लिक स्कूल की छात्रा नैवेद्या

दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर व्याकरण विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री की पुत्री नैवेद्या शास्त्री ने कमाल कर दिखाया है। संस्कृत भारती उत्तर प्रदेश न्यास, वाराणसी द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली अखिल भारतीय शलाका परीक्षा में उसे गोल्ड मेडल मिला है। श्री जयराम ब्रह्मचर्य आश्रम नई दिल्ली में रविवार को आयोजित इस कनिष्ठ संवर्ग की शलाका परीक्षा में देश भर के 40 स्कूली बच्चों ने भाग लिया जिसमें विषय विशेषज्ञों ने उसे टॉप घोषित किया। नैवेद्या दरभंगा जूनियर पब्लिक स्कूल की कक्षा छठी की छात्रा है और स्थानीय स्तर पर उसे पहले भी कई पुरस्कार मिल चुका है। इस जूनियर स्तर की शलाका परीक्षा में कक्षा सात तक के बच्चे शामिल हुए थे। टॉप करने पर आयोजन समिति द्वारा नैवेद्या को गोल्ड मेडल के साथ बीस हजार रुपये , चांदी की एक शलाका व प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। वहीं, प्राच्य विषयों में गहरी रुचि रखने वाली बच्ची नैवेद्या का कहना है कि संस्कृत विषयों को पढ़ने से एक अलग ही नैसर्गिक अनुभूति होती है। वेद आदि प्राच्य शस्त्रों के कई गूढ़ श्लोक उसकी जुबा पर रहते हैं।

इधर, अखिल भारतीय स्तर की अमरकोश शलाका परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर नैवेद्या के साथ साथ उनके पिता डॉ यदुवीर स्वरूप शास्त्री को विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग के प्राध्यापक प्रो.दयानाथ झा, प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. पुरेन्द्र वारिक, डॉ साधना शर्मा, डॉ एल सविता आर्या, डॉ धीरज पांडेय, डॉ शंभूशरण तिवारी, डॉ रितेश चतुर्वेदी, डॉ संतोष तिवारी, डॉ संतोष पासवान समेत अन्य संस्कृतज्ञों ने बधाई व शुभकामनाएं दी है।

क्या है शलाका परीक्षा

शलाका परीक्षा प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली की अत्यन्त वैज्ञानिक एवं परिष्कृत मूल्यांकन विधि है। प्राचीन भारतीय शास्त्रीय विषयों को यथावत् स्मरण रखने के साथ ही सम्पूर्ण शास्त्र के सांगोपांग को प्रदर्शित करने के लिए भी यह विधि अपनायी जाती है। इसे शास्त्र संरक्षण की मुख्य वाहिका के रूप में भी देखा जाता है। इस परीक्षा से व्यापक ज्ञान का भी परीक्षण किया जाता है। यह केवल रटने की क्षमता नहीं, बल्कि संदर्भ, पूर्ववर्ती और अनुवर्ती श्लोकों और लेखक के आशय को समझने की भी परीक्षा है। इसमें स्मृति के परीक्षण के साथ साथ सवाल-जवाब के माध्यम से प्रतिभागियों का सन्दर्भित विषयों के प्रति ज्ञान को भी परखा व जांचा जाता है। अमूमन यह परीक्षा व्याकरण, न्याय और अन्य वैदिक शास्त्रों में निपुणता के लिए आयोजित की जाती है।

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