भारत बहुभाषावाद एवं बहुसंस्कृतिवाद का देश, जिसकी इंद्रधनुषी संस्कृति समग्र विकास का मूल आधार- प्रो. चन्द्रभानु
मातृभाषा हमारे जीवन का आईना एवं हमारी पहचान, जिसके विकास हेतु भाषण नहीं, बल्कि सरजमीं पर काम करना जरूरी- प्रो. मुश्ताक
स्वरचित काव्य-पाठ एवं निबंध प्रतियोगिता में सफल 28 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं मेडल प्रदान कर किया गया सम्मानित


दरभंगा : मातृभाषा में वैज्ञानिक रूप से सहजता से सीखना एवं सीखाना संभव होता है। सभी विकसित देश अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही विकास किया है। सभी शिक्षा नीतियों में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा देने का सुझाव दिया है। फिर भी आज हम अंग्रेजी की दासता स्वीकार कर रहे हैं। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर हिन्दी, मैथिली, उर्दू एवं संस्कृत विभाग द्वारा जुबिली हॉल में आयोजित “अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह-2026” में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. चन्द्र भानु प्रसाद सिंह ने कही।

उन्होंने कहा कि भारत बहुभाषावाद एवं बहुसंस्कृतिवाद का देश है, जिसकी इन्द्रधनुषी संस्कृति ही उसके समग्र विकास का मूल आधार है। आज भारत में व्यापार की भाषा हिन्दी है, पर रोजगार की भाषा अंग्रेजी ही है, क्योंकि विज्ञान एवं तकनीक की शिक्षा अंग्रेजी में दी जाती है। उत्तर पूंजीवाद, तकनीक एवं शहरीकरण के युग में कई भाषाएं नष्ट हो रही हैं, क्योंकि वह रोजगार नहीं दे पा रही हैं। जब तक भाषाएं उत्पादन पद्धति एवं वितरण प्रणाली से नहीं जुड़ेंगी, तब तक वह विकसित नहीं हो सकती हैं। मातृभाषा में ही हमारी संस्कृति, संस्कार, मूल्य एवं विचारधारा प्रवाहमान हो सकती हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव एवं सीएम कॉलेज, दरभंगा के प्रधानाचार्य प्रो. मुश्ताक अहमद ने कहा कि मातृभाषा हमारे जीवन का आईना एवं हमारी पहचान है, जिनके विकास हेतु भाषण नहीं, बल्कि सरजमीन पर काम करना जरूरी है। उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने के इतिहास को विस्तार से बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में मातृभाषा को काफी महत्व दिया गया है, जिस कारण आज मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि की पढ़ाई मातृभाषा में भी होने लगी है। यदि मातृभाषाएं जीवित रहेंगे, तभी हमारी परंपरा, संस्कृति एवं पहचान भी जीवित रहेंगी। मातृभाषा राष्ट्रीय प्रगति की धारा में सकारात्मक भूमिका निभाती है, जिसमें पढ़ना, बोलना और समझना आसान होता है।
विशिष्ट वक्ता के रूप में वित्तीय परामर्शी इन्द्र कुमार ने कहा कि मातृभाषा केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि हमारी आत्मा है। यूनेस्को के अनुसार प्रत्येक 7 दिनों में एक भाषा लुप्त हो रही है। यदि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाते हैं तो अपनी संस्कृति से भी स्वत: कट जाते हैं।

कुलपति के प्रभार में प्रो. अशोक कुमार मेहता ने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी की अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की बधाई एवं शुभकामना संदेश रखते हुए छात्र-छात्राओं से अपनी मातृभाषा में मौलिक रचना करने पर बल देते हुए मातृभाषा के महत्त्वों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने पर अधिक सहज, आत्मविश्वासी और रचनात्मक होते हैं। मातृभाषा हमारी परंपराओं, लोककथाओं एवं साहित्य को जीवित रखने में सक्षम है। हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करें, प्रयोग बढ़ाएं और अगली पीढ़ियों तक सुरक्षित हस्तांतरित करें।
स्वागत संबोधन करते हुए मानविकी संकायाध्यक्ष सह समारोह के संयोजक प्रो. मंजू राय ने कहा कि मातृभाषा जन-जन की चेतना का प्रतीक है जो अपेक्षाकृत मीठी, सरल एवं लोकप्रिय होती है। इसका आदर अनिवार्य है, क्योंकि यह हमारी पहचान, संस्कृति की शान तथा मानव सभ्यता की धरोहर है। भारत जैसे बहुभाषी देश में मातृभाषाओं का सम्मान सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत करता है।

इस अवसर पर आयोजक चार विभागों द्वारा पूर्व में दो प्रतियोगिताएं आयोजित कर की गई थीं। मैथिली विभाग द्वारा आयोजित काव्य पाठ में आकृति झा- प्रथम, कंचन कुमारी- द्वितीय एवं रीभा कुमारी- तृतीय स्थान तथा निबंध प्रतियोगिता में अखिलेश कुमार यादव-प्रथम, रीभा कुमारी-द्वितीय तथा मिन्टू कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, संस्कृत विभाग में आयोजित काव्य पाठ में सम्पा नंदी-प्रथम, कुमकुम कुमारी-द्वितीय एवं रूपेश कुमार- तृतीय स्थान के लिए, जबकि निबंध प्रतियोगिता में कुमकुम कुमारी-प्रथम, श्वेता शिवानी- द्वितीय तथा रूपेश कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। हिन्दी विभाग के काव्य पाठ के लिए खुशबू कुमारी- प्रथम, अपर्णा कुमारी- द्वितीय एवं मालविका- तृतीय स्थान, जबकि निबंध प्रतियोगिता में मालविका- प्रथम, आयशा खातून- द्वितीय तथा धीरज कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं उर्दू विभाग के काव्य पाठ में सयेदा आशिया फातमा- प्रथम, उजमा परवीन- द्वितीय तथा आयेशा खातून एवं रिजवाना परवीन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि निबंध लेखन में सादिया कमर- प्रथम, राहत परवीन- द्वितीय, और सबा परवीन, इशरत मुमताज, सफीना खातून एवं अफरीन खातून ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी सफल प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा रैंक प्रमाण पत्र एवं मैडल प्रदान कर हौसलाअफजाई किया गया। समारोह में हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार, मैथिली विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा, उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. मो. इफ्तिखार अहमद तथा संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकान्त झा, प्रो. रमेश झा, डॉ. अमरेन्द्र शर्मा, डॉ. सोनू राम शंकर, डॉ. उदय कुमार, डॉ. सुजीत साफी आदि सहित 350 से अधिक विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं बीएड रेगुलर के एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित थे।

समारोह का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से, जबकि समापन राष्ट्रगान से हुआ। कुलगीत विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्रों ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत मिथिला पेंटिंग युक्त पाग, चादर एवं बुके से किया गया। मैथिली-प्राध्यापक सह उप परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुरेश पासवान के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत- प्राध्यापक सह एनएसएस समन्वयक डॉ. आरएन चौरसिया ने किया।
