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“आसिम मुनीर मेरे बॉस नहीं”-पाक रक्षा मंत्री का बयान, बताया कैसी है सत्ता की व्यवस्था

डेस्क: पाकिस्तान में सेना (Army in Pakistan) और सरकार के रिश्तों को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश में सेना का सीधा शासन नहीं है, बल्कि इसे वह “हाइब्रिड व्यवस्था” (Hybrid system) मानते हैं, जहां राष्ट्रीय संस्थान मिलकर काम करते हैं। साथ ही उन्होंने साफ किया कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर उनके बॉस नहीं हैं।

इंटरव्यू में उठा ‘असल सत्ता’ का सवाल

फ्रांसीसी मीडिया संगठन France 24 को दिए इंटरव्यू में आसिफ से पूछा गया कि क्या पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के पसंदीदा बताए जाने वाले मुनीर ही पाकिस्तान के वास्तविक शासक हैं। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा मानने वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन पाकिस्तान का राजनीतिक इतिहास जटिल रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 1950 और 1960 के दशकों में सेना ने कई बार सीधे सत्ता संभाली थी और राजनीतिक ढांचे में दखल दिया था।

“अब हालात अलग हैं”

रक्षा मंत्री के मुताबिक वर्तमान स्थिति को अतीत से अलग करके देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश इस समय आतंकवाद, क्षेत्रीय अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है।

उन्होंने अफगानिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं, भारत के साथ तनाव और कुछ साल पहले कमजोर हुई अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में संस्थानों के बीच सहयोग आवश्यक है।

सेना को बताया “महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थान”

आसिफ ने कहा कि पाकिस्तानी सेना देश की सबसे अहम संस्थाओं में से एक है, जो निर्वाचित सरकार का सहयोग कर रही है।
“मैं इसे हाइब्रिड अरेंजमेंट कहूंगा। पाकिस्तान में सेना का शासन नहीं है,” उन्होंने कहा।

“मेरे बॉस प्रधानमंत्री हैं”

जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या आसिम मुनीर उनके बॉस हैं, तो उन्होंने इसे खारिज करते हुए कहा—

“नहीं, वह मेरे बॉस नहीं हैं। मेरे बॉस प्रधानमंत्री हैं।”
पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हैं, जिनकी अगुवाई में गठबंधन सरकार काम कर रही है।

रक्षा मंत्री के इस बयान को पाकिस्तान की सिविल-मिलिट्री रिश्तों पर चल रही अंतरराष्ट्रीय बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से “हाइब्रिड व्यवस्था” शब्द का इस्तेमाल करते हुए सत्ता संरचना को परिभाषित करने की कोशिश की है।

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