डेस्क: भारत की बिजली प्रणालियों में बढ़ती जटिलताओं और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की बढ़ती हिस्सेदारी को संभालने के लिए कृत्रिम मेधा (AI) एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के विशेषज्ञों ने स्वच्छ ऊर्जा बदलाव (Clean Energy Transition) में AI की अपरिहार्य भूमिका पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के एक विशेषज्ञ ने यह बात कही। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ 2026 में आईईए के ऊर्जा विशेषज्ञ सिद्धार्थ सिंह ने कहा, ‘‘ हम ऊर्जा क्षेत्र में खासकर बिजली प्रणालियों में, जटिलता के तेजी से बढ़ते रुझान देख रहे हैं। यह क्यों बढ़ रही है? पहला कारण यह है कि सामान्य तौर पर बिजलीकरण लगातार बढ़ रहा है।’’
‘स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को गति देने में, ऊर्जा के लिए एआई’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में उन्होंने कहा कि अब ऊर्जा का अंतिम उपयोग अन्य ईंधनों की तुलना में अधिक बिजली पर निर्भर हो गया है। उन्होंने बताया कि प्रणाली में अब परिवर्तनीय नवीकरणीय बिजली की मात्रा कहीं अधिक हो गई है, जो पहले कभी नहीं थी। पहले बिजली के अधिकतर स्रोत स्थिर होते थे लेकिन अब सौर एवं पवन ऊर्जा के कारण स्थिति बदल चुकी है।
इस दशक के अंत तक परिवर्तनीय नवीकरणीय बिजली की हिस्सेदारी काफी बड़ी होने की उम्मीद है जो प्रणाली में एक बड़ा बदलाव है। इस अस्थिरता को संभालने के लिए बैटरी की जरूरत होती है, ताकि उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सके और इसके साथ ही नए तरह के बाजार भी उभर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब हमारे पास दीर्घकालिक लक्ष्य हैं, जो पहले नहीं थे। अब ऐसी प्रणालियों की जरूरत है जो अधिक स्वचालित हों और यहीं कृत्रिम मेधा की भूमिका सामने आती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ भारत के संदर्भ में परिवर्तनीय बिजली उत्पादन का बेहतर पूर्वानुमान बेहद अहम है। सौर और पवन ऊर्जा के लिए हर मिनट निगरानी या किसी खास स्थान पर बादलों की स्थिति को समझना जरूरी है… इसी तरह के समाधान भारत के लिए सबसे अधिक उपयोगी साबित होंगे।
