डेस्क: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को देश के बैंकिंग क्षेत्र और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक गेम-चेंजर कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने अधिग्रहण वित्तपोषण (Acquisition Financing) पर अंतिम दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं, जिसमें बैंकों को किसी कंपनी के अधिग्रहण के लिए सौदे के कुल मूल्य का 75 प्रतिशत तक ऋण देने की अनुमति दी गई है।
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मसौदा नियमों से अधिक उदार हुई नीति
दिलचस्प बात यह है कि अक्टूबर में जारी किए गए मसौदा नियमों (Draft Rules) में यह सीमा 70 प्रतिशत प्रस्तावित थी, जिसे अब अंतिम अधिसूचना में बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले भारतीय बैंकों को इस तरह की गतिविधियों के लिए वित्तपोषण की अनुमति नहीं थी।
बैंक वित्तपोषण अधिग्रहण मूल्य के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा
केंद्रीय बैंक ने कहा कि कुल बैंक वित्तपोषण अधिग्रहण मूल्य के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, जिसका स्वतंत्र आकलन संबंधित बैंक द्वारा किया जाएगा। शेष राशि अधिग्रहण करने वाली कंपनी को अपने संसाधनों से जुटानी होगी। नए नियमों के तहत बैंक प्रवर्तकों की हिस्सेदारी को भी वित्तपोषित कर सकेंगे, बशर्ते अधिग्रहण के बाद ऋण-इक्विटी अनुपात निरंतर आधार पर 3:1 से अधिक न हो। अधिग्रहीत इक्विटी शेयर या अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर किसी भी प्रकार के भार से मुक्त होने चाहिए।
आरबीआई ने बैंकों को अधिग्रहण वित्तपोषण के लिए निदेशक मंडल से अनुमोदित नीति बनाने के लिए कहा है। पात्र उधारकर्ता की न्यूनतम शुद्ध संपत्ति 500 करोड़ रुपये और लगातार तीन वर्षों का शुद्ध लाभ होना आवश्यक है। गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए निवेश-योग्य रेटिंग भी अनिवार्य होगी।
आरबीआई के ये दिशानिर्देश एक अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगे। केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर के अंत में पहली बार एक मसौदा जारी किया था, जिसमें बैंकों को अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया था। इससे पहले तक बैंकों को इस तरह की गतिविधि की अनुमति नहीं थी।
