डेस्क: आज यानी की 07 फरवरी को भारत के बैडमिंटन की दुनिया में चमकता सितारा श्रीकांत किदांबी अपना 33वां जन्मदिन मना रहे हैं। श्रीकांत ने शहर के माहौल से उठकर वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने अपने अद्भुत खेल से लाखों भारतीयों का दिल जीतने का काम किया। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर श्रीकांत किदांबी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
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जन्म और परिवार
आंध्र प्रदेश में 07 फरवरी 1993 को श्रीकांत किदांबी का जन्म हुआ था। इनके बड़े भाई नंदगोपाल खुद बैडमिंटन खिलाड़ी रहे। ऐसे में श्रीकांत की खेल यात्रा बचपन से शुरू हुई थी। अपने भाई को देखकर श्रीकांत इस खेल के प्रति उत्साहित हुए। नंदगोपाल ने न सिर्फ उनके खेल को दिशा दी, बल्कि उनको अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की अहमियत भी सिखाई। यही प्रेरणा और मार्गदर्शन उनकी सफलता की नींव बनी।
पहला प्रदर्शन
श्रीकांत किदांबी ने अपनी प्रतिभा का पहला और बड़ा प्रदर्शन तब दिखाया, जब उन्होंने पुरुष एकल में विश्व नंबर 1 रैंकिंग हासिल की। यह भारतीय बैडमिंटन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ओपन, इंडोनेशियाई ओपन और सैयद मोदी इंटरनेशनल जैसे प्रतिष्ठित खिताब जीते और अपने खेल का लोहा मनवाया। इन खिताबों के साथ श्रीकांत किदांबी ने यह साबित कर दिखाया कि निरंतर अभ्यास और मानसिक दृढ़ता से कोई भी बुलंदी छुई जा सकती है।
हालिया प्रदर्शन
बता दें कि हाल ही के महीनों में श्रीकांत ने बेहतरीन वापसी की है। उन्होंने अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और स्थिरता से यह साबित कर दिया है कि वह अभी भी शीर्ष स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वहीं मलेशिया मास्टर्स 2025 में लंबे समय के बाद उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बनाई और फाइनल में चीन के ली शी फेंग से मुकाबला हारने के बाद भी अपनी उत्कृष्ट खेल क्षमता दिखाई।
फिर कनाडा ओपन 2025 में श्रीकांत किदांबी ने विश्व रैंकिंग के शीर्ष खिलाड़ियों में से एक चाउ तियेन चेन को सीधे सेटों में हराकर सेमीफाइन में प्रवेश किया था। स्विस ओपन में श्रीकांत ने एच एस प्रन्नॉय को हराकर शुरूआत राउंड में जीत हासिल की। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा, लेकिन साल 2025 यूएस ओपन के शुरूआती राउंड में श्रीकांत को हार का सामना करना पड़ा था।
साल 2026 में बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में श्रीकांत किदांबी ने कोरिया के खिलाड़ी को हराया था। लेकिन टीम आगे नहीं बढ़ पाई। उन्होंने हालिया मुकाबलों में अपनी तकनीक, क्षमता और मानसिक दृढ़ता का प्रदर्शन किया है।
