
दरभंगा। आधुनिक युग में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं रही। परम्परागत पत्रकारिता, जो कभी समाचार पत्रों, रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से जनता तक सूचनाएँ पहुँचाने का प्रमुख साधन थी, अब डिजिटल युग की पत्रकारिता के उदय के साथ नई चुनौतियों का सामना कर रही है। डिजिटल मीडिया ने जहाँ एक ओर सूचना के प्रसार को लोकतांत्रिक बनाया है। दूसरी ओर इसने परम्परागत पत्रकारिता की विश्वसनीयता,प्रासंगिकता, आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार सह प्रोफेसर हरि नारायण सिंह ने स्व. राम गोविन्द प्रसाद गुप्ता की 30 वीं पुण्यतिथि पर दोनार स्थित सागर रेस्टोरेंट के सभागार में “डिजिटल युग मे परम्परागत पत्रकारिता की विश्वसनीयता” विषयक सेमिनार को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य वक्ता कही। उन्होंने कहा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर ( X), इंस्टाग्राम और यूट्यूब ने सूचना के उत्पादन, वितरण और उपभोग के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहाँ समाचार संगठनों के पास सूचना के प्रसार का एकाधिकार था, वहीं अब कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन के माध्यम से समाचार बना सकता है और उसे विश्व भर में फैला सकता है। मुख्य अतिथि दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ सन्दीप तिवारी ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया ने समाचार चक्र को अत्यधिक तीव्र कर दिया है। पहले समाचार पत्र अगले दिन छपते थे, और टेलीविजन समाचार भी कुछ घंटों के अंतराल पर प्रसारित होते थे। लेकिन अब सोशल मीडिया पर समाचार सेकंडों में विश्व भर में फैल जाता है। इस तीव्रता ने परम्परागत पत्रकारिता पर दबाव डाला है कि वे भी तुरंत समाचार प्रदान करें, डिजिटल युग की पत्रकारिता ने परम्परागत पत्रकारिता के आर्थिक मॉडल को भी हिला दिया है। पहले समाचार संगठन विज्ञापनों, ग्राहकों की सदस्यता के माध्यम से अपनी आय अर्जित करते थे। लेकिन अब अधिकांश विज्ञापन राजस्व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे गूगल और फेसबुक की ओर जाने लगा है। वरिष्ठ पत्रकार रवि भूषण चतुर्वेदी ने कहा परम्परागत पत्रकारिता में बदलाव होना ही था,पर ये बदलाव सकारत्मक हो या नकारात्मक हो, ये नई पीढ़ी को समझना होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल पत्रकारिता ने पाठकों के समाचार उपभोग के तरीके को भी बदला है। आज के पाठक छोटी, आकर्षक और दृश्यात्मक सामग्री को प्राथमिकता देते हैं। लंबे, गहन विश्लेषणात्मक लेखों की माँग कम हो रही है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, मीम्स और संक्षिप्त पोस्ट्स ने पाठकों का ध्यान खींच लिया है। उन्होंने पत्रकारिता के मुख्य छः विंदुयों को विस्तार से समझाते हुए कहा
डिजिटल युग में पत्रकारों पर कई तरह के दबाव बढ़े हैं। एक ओर, उन्हें तीव्र गति से समाचार प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है, और दूसरी ओर, उनकी सामग्री को सोशल मीडिया पर वायरल होने योग्य बनाना पड़ता है। इन चुनौतियों के बावजूद, परम्परागत पत्रकारिता के लिए कई रास्ते उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से यह अपनी प्रासंगिकता और प्रभाव को बनाए रख सकती है। वरिष्ठ पत्रकार गंगेश मिश्र ने कहा पत्रकारिता कभी बूढ़ी नही होती वो बदलती रहती है। सूचना, उपयोगिता और रोचकता ये तीन पहले भी थे और आज के डिजिटल युग मे भी उसी तरह से विद्यमान है। परम्परागत पत्रकारिता में खबरों को उल्टा पिरामिड की तरह परोसते थे। आज के डिजिटल युग मे सीधा पिरामिड की तरह परोसते है ये अंतर आया है,जो बाजार वाद के चलते हुआ है। सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए परम्परागत पत्रकारिता को अपनी विश्वसनीयता को और मजबूत करना होगा। डिजिटल मीडिया के युग में पत्रकारिता और परम्परागत पत्रकारिता के बीच एक संतुलित सह-अस्तित्व संभव है, बशर्ते दोनों एक-दूसरे के पूरक बनें और जनता तक सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी सूचनाएँ पहुँचाने के साझा लक्ष्य की ओर काम करें। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा लोकतंत्रीकरण जहाँ सकारात्मक है,इसके कई नकारात्मक प्रभाव भी हैं। परम्परागत पत्रकारिता में समाचारों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सख्त सम्पादकीय प्रक्रियाएँ और तथ्य-जाँच के मानक होते थे।
सेमिनार का सफल संचालन एवं अतिथियों का स्वागत अपने सधे हुए शव्दों में डॉ. ए.डी.एन. सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत पत्रकार पुर्व पार्षद प्रदीप गुप्ता ने किया वही धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गुप्ता ने किया। कार्यक्रम के शुरुआत में स्व. राम गोविन्द प्रसाद गुप्ता के तैल चित्र पर अतिथियों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।