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अचानक 114 राफेल विमान खरीदने की जरूरत क्यों पड़ गयी? इस सौदे में भारत ने क्या शर्तें रखी हैं

डेस्क :भारत की सेनाओं को आधुनिक हथियारों और अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने, सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और हर मोर्चे पर दुश्मन को करारा जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी पीछे नहीं रहते। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उनकी नीति साफ है कि ताकत ही शांति की सबसे मजबूत गारंटी होती है। इसी सोच के तहत भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला एक और निर्णायक कदम अब आकार ले रहा है। राफेल लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाने की दिशा में सरकार की ताजा पहल न केवल वायुसेना की कमजोर पड़ती स्क्वाड्रन ताकत को संबल देगी, बल्कि बदलते सामरिक परिदृश्य में भारत को निर्णायक बढ़त भी दिलाएगी। हम आपको बता दें कि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता वाले रक्षा खरीद बोर्ड ने फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी औपचारिक प्रक्रिया का पहला ठोस चरण है, जिसके बाद प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद के सामने जाएगा और अंतत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति से अंतिम स्वीकृति मिलेगी। अनुमान है कि यह सौदा करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का होगा, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बन सकता है।

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