डेस्क :मुंबई, जिसे भारत की आर्थिक धड़कन और सपनों की नगरी कहा जाता है, आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। पिछले कुछ वर्षों का राजनीतिक घटनाक्रम यह साफ जाहिर करता है कि मुंबई की प्रगति सीधे तौर पर सत्ता की नीयत और नेतृत्व की कार्यक्षमता से जुड़ी है। अब एक बार फिर विकास के दावों और राजनीतिक बहसों के केंद्र में है। जैसे-जैसे बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक दल शहर के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को एक प्रमुख चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
