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बांग्लादेश में नहीं थम रही हिंसा, चुनाव से पहले एक और छात्र नेता की गोली मारकर हत्या

डेस्क: बांग्लादेश में हिंसा का दौर जारी है। पुलिस ने बताया कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका में अज्ञात बदमाशों ने पूर्व स्वेच्छासेवक दल के नेता अजीजुर रहमान मुसब्बिर की गोली मारकर हत्या कर दी। यह बांग्लादेश में चुनावों से पहले राजनीतिक हिंसा की ताजा घटना है। मुसब्बिर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की स्वयंसेवी शाखा ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ स्वेच्छासेवक दल के महासचिव के रूप में काम कर चुके थे। उन्हें ढाका के कारवान बाजार इलाके में गोली मारी गई थी।

बांग्लादेश में बढ़ी हिंसा

पुलिस ने बताया कि हमला ढाका के बीच में एक भीड़भाड़ वाले कमर्शियल जोन, बसुंधरा सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के नजदीक, सुपर स्टार होटल के पास हुआ। शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि बदमाशों ने करीब से गोली चलाई, जिससे मुसब्बिर की मौके पर ही मौत हो गई। अजीजुर रहमान मुसब्बिर की हत्या बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा के बीच हुई है, जबकि 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले आचार संहिता लागू है। गोलीबारी में एक शख्स गंभीर रूप से घायल हुआ है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अधिकारियों ने कहा कि घायल व्यक्ति की हालत स्थिर है।

पुलिस ने शुरू किया तलाशी अभियान

स्थानीय मीडिया ने बताया कि पीड़ितों को पहले बीआरबी अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद उनमें से एक को आगे के इलाज के लिए ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांचकर्ताओं ने बताया कि हमलावरों ने इलाके से भागने से पहले कई राउंड गोलियां चलाईं। हालांकि, सुरक्षा अधिकारियों ने हमलावरों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है। बुधवार सुबह तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

इस बीच यहां यह भी बता दें कि, बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव होने हैं। हाल के दिनों में देश में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ दिनों पहले जुबो दल (युवा विंग) के एक नेता को गोली मार दी गई थी। इसके अलावा, 12 दिसंबर 2025 को इंकलाब मंच के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी को गोली मार दी गई थी। हादी की मौत के बाद देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई थी। चुनाव नजदीक आने के साथ बढ़ती हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। कई विश्लेषक इसे चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाला खतरा मान रहे हैं।

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