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घर के साथ ऑफिस के खर्चों को भी कंट्रोल में रखती हैं महिलाएं, 5000 कंपनियों के डेटा में हुआ खुलासा

डेस्क: महिलाएं बढ़ीं तो गलतियां और लागत दोनों घटीं यह दावा नहीं, बल्कि 5000 कंपनियों के डेटा पर आधारित एक बड़े विश्लेषण का निष्कर्ष है। स्टडी में सामने आया कि जिन कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी (खासकर नेतृत्व और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में) बढ़ी, वहां ऑपरेशनल गलतियां कम हुईं और खर्च भी घटा। अमेरिका की शोधकर्ताओं का यह अध्ययन रिव्यू ऑफ अकांउटिंग स्टीडिज की अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल पत्रिका में प्रकाशित हुआ।

क्या कहता है डेटा?

स्टडी में करीब 10 साल तक करीब 5000 कंपनियों का डाटा देखा गया। अध्ययन में पाया गया जिन कंपनियों में महिला कर्मचारियों/लीडर्स की संख्या ज्यादा थी, वहां प्रोसेस एरर्स कम पाए गए, रिसोर्स वेस्टेज घटा, डेडलाइंस मिस होने  के मामले कम हुए कुल मिलाकर कॉस्ट एफिशिएंसी बेहतर हुई। इस अध्ययन से एक बात तो साफ हो गई कि महिलाएं घर ही नहीं  बाहर भी अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं।

क्या है इसकी वजह 

बेहतर निर्णय क्षमता: महिलाएं फैसले लेते समय डिटेल्स पर ज्यादा ध्यान देती हैं, जिससे गलतियों की गुंजाइश कम होती है।

जोखिम प्रबंधन में मजबूती : डेटा बताता है कि महिलाएंअनावश्यक जोखिम लेने से बचती है, जिससे वित्तीय नुकसान घटता है।

 टीम मैनेजमेंट और कम्युनिकेशन: महिला लीडरशिप में टीम को सुनने की प्रवृत्ति ज्यादा, क्लैरिटी बेहतर करती है  जिससे काम स्मूद चलता है।

एथिकल और प्रोसेस-ड्रिवन अप्रोच: नियमों का पालन और सिस्टम फॉलो करने की आदत से कानूनी व ऑपरेशनल चूक कम होती है।

एक्सपर्ट्स की राय

जेंडर डाइवर्सिटी कोई सोशल पहल भर नहीं, बल्कि स्मार्ट बिज़नेस स्ट्रैटेजी  है। 5000 कंपनियों के डेटा से यह साफ है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से गलतियां घटती हैं, लागत कम होती है और कंपनी का प्रदर्शन ज्यादा स्थिर और टिकाऊ  बनता है। यानी महिलाओं में निवेश सिर्फ समानता की बात नहीं,मुनाफे का भी फॉर्मूला है।

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