रोजगार

इस राज्य के सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! 8वें वेतन आयोग का गठन, ऐसा करने वाला देश में पहला स्टेट

डेस्क: भारतीय प्रशासनिक और वित्तीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, असम देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने आधिकारिक तौर पर 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर दी है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का यह निर्णय न केवल राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है, बल्कि यह केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल पेश करता है.
यह घोषणा एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर की गई है जब 7वें वेतन आयोग की निर्धारित दस वर्षीय अवधि 1 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई. सरकार ने इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए पूर्व मुख्य सचिव सुभाष दास को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है. उनकी अनुभवी देखरेख में यह आयोग राज्य की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने का कार्य करेगा.

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए इसके मायने

असम सरकार के इस सक्रिय दृष्टिकोण ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों के बीच खुशी की लहर पैदा की है. 8वें वेतन आयोग का प्राथमिक उद्देश्य वर्तमान महंगाई दर और जीवन स्तर को देखते हुए मूल वेतन और भत्तों का पुनर्गठन करना, सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पेंशन राशि को अपडेट करना है.

आयोग को रिपोर्ट देने में लगेगा समय

हालांकि आयोग का गठन हो गया है, लेकिन इसका लाभ तुरंत मिलना संभव नहीं होता. वेतन आयोग एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न विभागों से डेटा जुटाना, हितधारकों से संवाद करना और वित्तीय भार का आकलन करना शामिल होता है. आमतौर पर एक आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने में लगभग 18 महीने का समय लगता है.

लागू होने का समय

विशेषज्ञों का अनुमान है कि भले ही एरियर 2026 से लागू हो, लेकिन नई वेतन व्यवस्था का वास्तविक लाभ कर्मचारियों की जेब तक 2027-28 या 2028-29 तक पहुंच सकता है.

असम की रणनीतिक बढ़त

असम द्वारा समय से पहले उठाया गया यह कदम रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. अक्सर राज्य सरकारें केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय वेतन आयोग की घोषणा का इंतजार करती हैं. लेकिन असम ने पहले पहल करके खुद को एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया है.

इससे होने वाले मुख्य लाभ

संभावना है कि असम के कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का लाभ केंद्र सरकार के कर्मचारियों से पहले मिल जाए. समय पर लिया गया यह निर्णय सरकारी मशीनरी में विश्वास पैदा करता है और कार्यक्षमता को बढ़ावा देता है.

समय से पहले आयोग बनाने से सरकार को भविष्य में आने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ के लिए बेहतर बजट प्लानिंग करने का अवसर मिलता है. अब सबकी निगाहें सुभाष दास कमेटी की सिफारिशों पर टिकी हैं, जो असम के लाखों परिवारों के आर्थिक भविष्य की नई रूपरेखा तैयार करेंगी.

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