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2 लाख करोड़ के 68 युद्धपोत…इंडियन नेवी का ये प्लान जानकर दहल जाएंगे चीन-पाकिस्तान, जानिए कैसे नौसेना की ताकत हो रहा है इजाफा

डेस्क: समंदर में अपना दबदबा बरकरार रखने के लिए भारतीय नौसेना आधुनिकीकरण की लंबी योजना पर काम कर रही है. भारत की शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री को सरकार से भी खूब सहयोग मिल रहा है. अगले दस सालों में भारत को टॉप के पांच शिपबिल्डिंग देशों और एक ग्लोबल शिप-रिपेयर हब के रूप में स्थापित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है. एक लंबी अवधि की दूरदर्शी योजना के तहत भारतीय नौसेना के लिए भी लगातार अलग-अलग तरह के युद्धपोत बनाए जा रहे हैं.

भारतीय नौसेना का रोडमैप

भारतीय नौसेना का लक्ष्य 2035 तक 175-200 युद्धपोतों का बेड़ा तैयार करना है. नेवी के पास अभी मौजूद जहाजों की संख्या 132 है. भारतीय नौसेना के पास अभी 68 युद्धपोत और सहयोगी जहाज ऑर्डर पर हैं. इनकी कुल कीमत 2 लाख करोड़ है. समुद्र में सिर्फ भारत के युद्धपोतों की संख्या ही नहीं बढ़ रही है. तटीय क्षेत्रों में नए बंदरगाह और समुद्री गतिविधियों से जुड़े ढांचे भी बड़े पैमाने पर बनाए जा रहे हैं.

प्रोजेक्ट-18 क्लास के विध्वंसक

प्रोजेक्ट 18 (P-18) के तहत अगली पीढ़ी के विध्वंसक बनाने पर तेजी से काम हो रहा है. इस श्रेणी के युद्धपोतों का वजन 13000 टन होगा जो भारतीय बेड़े का सबसे बड़ा पोत होगा. वर्तमान में नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोत विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसक हैं. इनका वजन 7,450 टन है. प्रोजेक्ट 18 (P-18) के तहत बन रहे युद्धपोत 13000 टन के होंगे. ये विध्वंसक 48 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और 64 कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस होंगे. नए युद्धपोतों का निर्माण 2035 तक पूरा होने की उम्मीद है. आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत बनने वाले इन युद्धपोतों में 75% स्वदेशी सामग्री होगी. इन पर मल्टीरोल हेलीकॉप्टर भी तैनात किए जा सकते हैं.

इंडियन नेवी की लंबी अवधि की योजना को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय नौसेना अगले कुछ दशकों में पूरी तरह से ब्लू-वॉटर फोर्स बनने की राह पर है. सबसे खास बात ये है कि नौसेना का आधुनिकीकरण स्वदेशी उपकरणों और संस्थाओं के दम पर हो रहा है. वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो प्लानिंग से लेकर कंस्ट्रक्शन स्टेज तक अगली पीढ़ी के युद्धपोतों को आकार देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

इंडियन नेवी का ऑपरेशनल एरिया फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक और उत्तरी बंगाल की खाड़ी से लेकर दक्षिणी हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट तक फैला हुआ है. इस पूरे क्षेत्र में भारत को चीन-पाकिस्तान की जोड़ी के अलावा विद्रोहियों और लुटेरों से भी निपटना है. भारत का 95% व्यापार (855 मिलियन टन) समुद्री रास्तों से होता है. इसकी सुरक्षा के लिए देश के पास एक मजबूत नेवी का होना बेहद जरूरी है जिस पर देश तेजी से आगे बढ़ रहा है.

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