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पुणे से सियासी संकेत: अजित पवार की तारीफ से बदला सुर, क्या एनसीपी में फिर बनेगी बात?

पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा हलचल पुणे से दिख रही है। मुंबई के मेयर पद को लेकर जहां पूरे देश की निगाहें टिकी हैं, वहीं पुणे नगर निगम चुनाव से पहले एनसीपी के दोनों खेमों के एकजुट होने की अटकलों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। इस चर्चा को और हवा मिली है शरद पवार गुट की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले के हालिया बयानों से, जिनमें उन्होंने अजित पवार की खुलकर सराहना की है।

पुणे में पार्टी की अंदरूनी उठापटक के बीच सुप्रिया सुले का बयान राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा में है। शहर अध्यक्ष प्रशांत जगताप के इस्तीफे के बाद पुणे पहुंचीं सुप्रिया सुले ने संकेतों में बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वह “समंदर की मछली” हैं, जो बड़े दायरे में सोचती है,इसे अजित पवार के प्रति नरमी और भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

अजित पवार पर भरोसे का संकेत:

सुप्रिया सुले ने साफ कहा कि अजित पवार ने अपनी वैचारिक जमीन नहीं छोड़ी है और वह शाहू-फुले-अंबेडकर की विचारधारा पर चल रहे हैं। उनके इस बयान को एनसीपी के दोनों गुटों के बीच संभावित गठबंधन की दिशा में अहम माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन बातचीत जारी है।

पुणे में बदलते समीकरण:

प्रशांत जगताप का इस्तीफा शरद पवार गुट के लिए झटका माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह दोनों एनसीपी के साथ आने के खिलाफ थे। दूसरी ओर, बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना पहले ही पुणे में तैयारी में जुटी है, जबकि कांग्रेस अलग मोर्चा बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में एनसीपी के दोनों धड़ों का साथ आना चुनावी गणित को पूरी तरह बदल सकता है।

RSS कार्यक्रम से दूरी और राजनीतिक संदेश:

हाल ही में अजित पवार द्वारा आरएसएस मुख्यालय जाने का कार्यक्रम छोड़ना भी चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री फडणवीस और एकनाथ शिंदे जहां हेडगेवार स्मारक पहुंचे, वहीं अजित पवार की गैरमौजूदगी को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रिया सुले की तारीफ को और ज्यादा अहम माना जा रहा है।

अब सवाल यही है कि क्या पुणे से ‘गुड न्यूज’ आने वाली है और क्या एनसीपी एक बार फिर साथ आकर चुनावी मैदान में उतरेगी? अगले कुछ घंटों या दिनों में इस पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

आशुतोष झा

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