राष्ट्रीय

सुशासन के अटल पथ पर अग्रसर छत्तीसगढ़

डेस्क :भारत रत्न श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति में विकास और सुशासन के प्रतीक हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज भारत विकास की जिस यात्रा की ओर अग्रसर है, उसके पीछे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा दिया गया सुशासन का वह मंत्र पाथेय है, जिसे केन्द्र एवं राज्य की डबल इंजन की सरकारों ने अंत्योदय की रीति-नीति बनाया है। भारतीय राजनीति के अजातशत्रु कवि हृदय अटल जी छत्तीसगढ़ से गहरा नाता था। छत्तीसगढ़ निर्माण से पहले रायपुर के सप्रे मैदान में आयोजित चुनावी सभा का दृश्य आज भी मुझे याद है, जब अटल जी की एक झलक पाने के लिए छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लोग वहां पहुंचे थे। उस समय उन्होंने जैसे ही छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया का उद्घोष लगाया पूरा मैदान छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति आस्था के भाव से स्पंदित हो उठा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आप 11 सीट जीतकर दीजिए, मैं छत्तीसगढ़ राज्य दूंगा। उस चुनाव में हमारी पार्टी के सात सांसद छत्तीसगढ़ से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। श्रद्धेय अटल जी ने छत्तीसगढ़वासियों से किया गया वादा पूरा कर अपनी संकल्पबद्धता को प्रमाणित कर राजनीतिक प्रतिबद्धता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। 31 जुलाई 2000 को लोकसभा और 9 अगस्त को राज्यसभा में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रस्ताव पर मुहर लगी। चार सितम्बर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद एक नवम्बर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य देश के 26 वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

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