केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) के सुप्रीमो जीतन राम मांझी अपने एक विवादित बयान को लेकर सियासी हलकों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। उनके इस बयान ने NDA को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है।
एक हालिया पार्टी कार्यक्रम के दौरान जीतन राम मांझी ने दावा किया कि देश में लगभग सभी सांसद और विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए मिलने वाले फंड में से कमीशन लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं कई बार अपना कमीशन पार्टी को दिया है और पार्टी नेताओं को सलाह दी है कि उस पैसे का उपयोग वे कार खरीदने जैसे कामों में करें।
मांझी ने विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर 10 प्रतिशत कमीशन नहीं मिल पा रहा है, तो कम से कम 5 प्रतिशत तो जरूर लेना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि “एक रुपये में से 10 पैसे भी लिए जाएं, तो वह रकम बहुत बड़ी होती है।”
इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है और विपक्ष इसे भ्रष्टाचार की खुली स्वीकारोक्ति बता रहा है, वहीं NDA के भीतर भी असहजता साफ देखी जा रही है।
आशुतोष झा
