पटना: बिहार की राजनीति का केंद्र बिंदु यह बन गया है कि इस बार राज्यसभा कौन जाएगा? स्थिति यह है कि इस बार राज्यसभा की पांच सीट खाली हो रही हैं। विधायकों की संख्या के अनुसार, इस बार यह तय है कि पांचों सांसद एनडीए से जाएंगे।हालांकि पांच राज्य सभा सदस्य कार्यकाल पूरा होने जा रहा है, पर संभावित नामों को लेकर तो कई नाम राजनीतिक गलियारों में घूम रहे हैं। इनमें एक नाम बीजेपी की ओर से भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह का है। लेकिन सवाल उठ रहा है क्या बीजेपी पवन सिंह पर दांव लगाकर अपना ‘AP वाला’ यानी अगड़ा पिछड़ा समीकरण बिगाड़ेगी।
राज्यसभा में इनका पूरा हो रहा कार्यकाल
इस नए वर्ष 2026 में पांच राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल पूरे होने हैं। इनमें राजद के प्रेम चंद गुप्ता और एडी सिंह हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। जनता दल (यू) के दो राज्यसभा सदस्यों के भी कार्यकाल पूरा होगा। इनमें राज्यसभा के सभापति हरिवंश नारायण और रामनाथ ठाकुर शामिल हैं। पांचवीं सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की खाली होनी है। इनका कार्यकाल भी नौ अप्रैल, 2026 को समाप्त हो जाएगा।
जदयू के दो नाम तो तय!
जनता दल (यू) की बात करें तो इनके रणनीतिकार हरिवंश नारायण और राम नाथ ठाकुर को ही रिपीट करेंगे। हरिवंश नारायण तो राज्यसभा के सभापति ही हैं और रामनाथ ठाकुर तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में ही हैं। जदयू इन दोनों को पुनः राज्यसभा भेज सवर्ण और पिछड़ा वर्ग की राजनीति का संतुलन बना कर रखना भी चाहती है।
एक सीट तो लोजपा (आर) के लिए तय
विधान सभा चुनाव 2025 में जब सीट शेयरिंग की बात हो रही थी तब लोजपा (आर) के अध्यक्ष चिराग पासवान 40 सीटों पर अड़े थे। पर बीजेपी के रणनीतिकारों ने उनके पांच सांसद के अनुसार 29 सीटें दी और एक राज्यसभा का वादा किया।लोजपा (आर) के सूत्रों की माने तो चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजना चाहते हैं।
बीजेपी के पास दो सीट
भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो वो भी दो नेताओं को राज्यसभा भेज सकती है। इनमें एक नाम तो तय है। और ये नाम है भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का। मंत्री पद से इस्तीफा देने और विधायक का भी पद छोड़ने के फैसले के बाद यह रास्ता खुलता है। अब एक सीट को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई नामों को लेकर चर्चा तेज है। इनमें एक नाम पवन सिंह का आ रहा है। कहा जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा को इस बार ड्रॉप किया जाएगा।पवन सिंह को लेकर यह कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी का प्रचार किया था। उन्हें इस बात का पुरस्कार मिल सकता है। पर बीजेपी को क्या लोकसभा चुनाव का दंश याद नहीं होगा? शाहाबाद का शून्य भी बीजेपी को याद होगा? यह संभव है कि एमएलसी बना कर उनका साथ हासिल रखा जा सके।
क्या बीजेपी अगड़ा पिछड़ा का समीकरण तोड़ेगी
राजनीतिक गलियारों की माने तो अगड़ा पिछड़ा का संतुलन बना कर चलने वाली बीजेपी राज्यसभा में दोनों सीट सवर्ण के हिस्से में दे कर अपनी रणनीति के विरुद्ध नहीं जाएगी। यह संभव है कि उपेंद्र कुशवाहा रिपीट नहीं हों। पर दूसरा उम्मीदवार ओबीसी से जाएगा। संभावनाओं की बात करें तो इस बार बीजेपी में उपेक्षित रहे कुर्मी से किसी को भेज कर अपना संतुलन बना सकती है। अतिपिछड़ा भीं एक महत्वपूर्ण दावेदार के रूप में दिख रहा है। वैसे राजनीति में तो कुछ भी संभव है। और जीत के उन्माद में तो लीक से हटकर बीजेपी चल भी सकती है।
